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UGC से लेकर ट्रेड डील तक विपक्ष ने घेरा! क्या मुद्दों की आंधी में फँस गई मोदी सरकार?

क्या यह संयोग है… या फिर संकेत? क्या मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में पहली बार एक साथ कई मोर्चों पर दबाव महसूस कर रही है? बैसाखी के सहारे खड़ी सरकार का क्या अब संतुलन डगमगाने लगा है? संसद के भीतर और सड़कों के बाहर-इस बार विपक्ष बिखरा हुआ नहीं, बल्कि एक सुर में सवाल पूछता हुआ नजर आ रहा है।

चीन से सीमा तनाव का पुराना घाव, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी संभावित डील्स, उन्हें खुश करने की कोशिश में रूस से सस्ते तेल और ईरान जैसे पुराने रणनीतिक साझेदारों से दूरी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अचानक उछला एपस्टीन फाइल जैसा संवेदनशील मुद्दा- ये सभी सवाल अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ मोदी सरकार के दरवाज़े पर दस्तक दे रहे हैं। क्या यही वह मौका है, जिसका इंतज़ार विपक्ष वर्षों से कर रहा था? और क्या पहली बार सत्ता के अभेद्य दिखने वाले किले में दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं?

पूर्व सेना प्रमुख की किताब: सरकार की असहजता का नया केंद्र

राहुल गांधी ने चीन विवाद को और धार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक से डर रही है।

उनका कहना है कि पहले सरकार ने यह कहकर चर्चा रोकने की कोशिश कि यह अंश अभी अप्रकाशित है लेकिन जब वही अंश एक पत्रिका में प्रकाशित होकर सार्वजनिक हो गया, तब भी उन्हें संसद में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी का आरोप है कि “अगर यह अंश सामने आ गया, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सच्चाई सामने आ जाएगी।”

ट्रंप फैक्टर और संभावित डील्स

डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा प्रभाव में आने की संभावना के बीच भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं तेज़ हैं। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता कमज़ोर हो रही है,क्या कुछ फैसले “डिप्लोमैटिक बैलेंस” से ज़्यादा व्यक्तिगत केमिस्ट्री पर आधारित हैं? ट्रंप की पुरानी बयानबाज़ी (मध्यस्थता, ट्रेड प्रेशर) आज फिर विपक्षी तर्कों को धार दे रही है।

रूसी तेल: सस्ता फायदा या दीर्घकालिक जोखिम?

रूस से सस्ते तेल ने भारत लेता रहा है, लेकिन अब यही मुद्दा राजनीतिक दबाव बन रहा है। विपक्ष पूछ रहा है: क्या अमेरिका को खुश करने के लिए भारत को इस नीति से पीछे हटना पड़ेगा? अगर ऐसा हुआ तो महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि यह घरेलू अर्थव्यवस्था को सीधे छूता है।

ईरान से रिश्ते: रणनीति या मजबूरी?

चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय संतुलन के बावजूद भारत–ईरान रिश्तों में ठंडापन विपक्ष का नया हथियार बन रहा है। आरोप है कि अमेरिका के दबाव में भारत अपने पुराने, भरोसेमंद साझेदार से दूरी बना रहा है। इससे सरकार पर यह आरोप लग रहा है कि वह “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति से समझौता कर रही है।

UGC आदेश पर रोक: सुप्रीम कोर्ट की दखल, विपक्ष का हमला तेज

यूजीसी के नए आदेश को लेकर देशभर में बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी है,
जिससे सरकार और शिक्षा मंत्रालय को अस्थायी झटका लगा है।

विपक्ष की नई रणनीति: मुद्दों की “क्लस्टरिंग”

इस बार विपक्ष अलग-अलग नहीं, बल्कि सभी मुद्दों को जोड़कर सरकार को घेर रहा है।

रणनीति साफ है=विदेश नीति → राष्ट्रीय सुरक्षा → महंगाई → नैतिक सवाल

यही कारण है कि सरकार को एक साथ कई मोर्चों पर जवाब देना पड़ रहा है।

SYED MOHAMMAD ABBAS

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