अहमदाबाद: गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा की धूम के बीच महिला पुलिसकर्मी एक ऐसी जिम्मेदारी निभा रही हैं, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया पर भी हो रही है। पारंपरिक चनिया-चोली पहनकर गरबा करती ये महिलाएं दरअसल सादे कपड़ों में तैनात पुलिस अधिकारी हैं, जो भीड़ के बीच रहकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं। इनकी मौजूदगी का अंदाजा कई बार आसपास मौजूद लोगों को भी नहीं होता। वायरल हो रहे वीडियो के बीच एक महिला पुलिस अधिकारी ने अपनी ड्यूटी के तरीके को समझाते हुए कहा कि वे ‘मिस्टर इंडिया’ की तरह हैं, जो आसपास तो रहते हैं, लेकिन आसानी से दिखाई नहीं देते।
वडोदरा की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की प्रमुख और ‘SHE टीम’ की सदस्य इंस्पेक्टर चंद्रिका आसुंद्रा पिछले दो वर्षों से नवरात्रि के दौरान इस तरह ड्यूटी कर रही हैं। 38 वर्षीय आसुंद्रा हर शाम पारंपरिक कपड़े पहनकर गरबा स्थलों पर पहुंचती हैं। वह अन्य लोगों के साथ नृत्य करती हैं, लेकिन उनकी नजर भीड़ में होने वाली गतिविधियों पर लगातार बनी रहती है।
गुजरात पुलिस की ‘SHE टीम’ महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए काम करती है। आसुंद्रा के साथ कई अन्य महिला अधिकारी भी गरबा आयोजनों में सादे कपड़ों में तैनात रहती हैं।
आसुंद्रा के मुताबिक, वर्दी हो या पारंपरिक पोशाक, उनकी सतर्कता और आत्मविश्वास में कोई बदलाव नहीं आता। उन्होंने बताया कि सादे कपड़ों में ड्यूटी करने का एक फायदा यह है कि लोग उन्हें पहचान नहीं पाते और वह गरबा में शामिल रहते हुए भी अपना काम कर सकती हैं।
उनका कहना है कि वर्दी देखकर लोग आमतौर पर अपना व्यवहार बदल लेते हैं, लेकिन जब उन्हें सामने मौजूद महिला के पुलिस अधिकारी होने का पता नहीं होता, तब उनके वास्तविक व्यवहार को समझने का मौका मिलता है।
नवरात्रि के दौरान गुजरात के शहरों में गरबा आयोजन बड़े स्तर पर होते हैं। अहमदाबाद में इस साल 84 व्यावसायिक गरबा आयोजनों के अलावा सड़कों और सोसायटियों में करीब 1,300 सामुदायिक गरबा स्थल हैं। इन आयोजनों में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरे शहर में लगभग 14,000 पुलिसकर्मियों और होमगार्ड की तैनाती की गई है।
इस व्यवस्था में 49 ‘SHE टीमें’ शामिल हैं, जिनमें कुल 300 कर्मचारी हैं। नवरात्रि की पहली तीन रातों यानी 11 से 13 अक्टूबर के बीच इन टीमों ने 65 से 80 व्यावसायिक गरबा आयोजनों और 340 से 350 सामुदायिक गरबा स्थलों का दौरा किया।
गुजरात पुलिस में वर्ष 2014 से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इसके चलते पुलिस बल में महिला कर्मियों की पर्याप्त संख्या है, जिन्हें नवरात्रि जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
सब-इंस्पेक्टर हेतल जडेजा वर्ष 2022 से गरबा आयोजनों में ड्यूटी कर रही हैं। अब वह अपनी टीम का नेतृत्व करती हैं। उनके मुताबिक, सादे कपड़ों में तैनाती के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को गरबा करने का अवसर भी मिल जाता है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को शायद ही छुट्टी मिलती है, ऐसे में ड्यूटी के बीच गरबा की कुछ तालियों का आनंद लेना भी खास अनुभव होता है।
जडेजा बताती हैं कि गरबा स्थलों पर महिला पुलिसकर्मियों की सादे कपड़ों में तैनाती का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। पुलिस वर्दी में दिखाई दे तो लोग कुछ समय के लिए सतर्क हो सकते हैं, लेकिन जब उन्हें यह पता रहता है कि भीड़ में सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी मौजूद हैं, तो गलत व्यवहार करने से पहले वे अधिक सावधानी बरतते हैं।
उनके मुताबिक, गरबा आयोजनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ होने वाले कुछ आयोजनों में आधी रात को लाउडस्पीकर बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन गरबा जारी रहता है। कई आयोजन सुबह पांच बजे तक चलते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक मैदान में रहकर निगरानी करनी पड़ती है।
गरबा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें भाषा की बाधा, अलग-अलग राज्यों से आए लोगों से संवाद और युवा पीढ़ी तक पहुंच बनाना भी शामिल है।
अहमदाबाद की महिला अपराध शाखा की प्रमुख सहायक पुलिस आयुक्त हिमाला जोशी के मुताबिक, शहर में दूसरे राज्यों से आए विद्यार्थी और प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में रहते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों के लिए गुजराती के अलावा हिंदी और अंग्रेजी में भी संवाद कर पाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि पुलिस का प्रयास नई पीढ़ी, खासकर जेनरेशन जेड, के बीच भरोसा कायम करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर युवा बिना किसी झिझक के मदद मांग सकें। पुलिस और आम लोगों के बीच की दूरी कम करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है।
वडोदरा में जोन-2 की पुलिस उपायुक्त मंजिता वंजारा के मुताबिक, महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी केवल गरबा स्थलों तक सीमित नहीं रहती। टीमें आयोजन स्थलों के बाहर और रास्तों के सुनसान हिस्सों में भी निगरानी करती हैं, ताकि कार्यक्रम में प्रवेश करते समय या देर रात घर लौटने के दौरान होने वाली परेशानी और विवादों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
मंजिता वंजारा ने बताया कि भीड़भाड़ वाले गरबा आयोजनों में ड्यूटी करने के लिए महिला अधिकारियों को एक महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा, तकनीकी टीम कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की मदद से निगरानी व्यवस्था में सहयोग करती है। आयोजकों के पास पुरुष और महिला प्रतिभागियों के साथ दर्शकों की संख्या का भी रिकॉर्ड रहता है।
वंजारा के मुताबिक, ‘SHE टीम’ की महिला पुलिसकर्मियों को गरबा प्रतिभागियों के रूप में तैनात करने का उद्देश्य भीड़ में असामाजिक तत्वों पर नजर रखना और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं पर तुरंत हस्तक्षेप करना है। करीब 50,000 लोगों की भीड़ वाले आयोजनों में भी पुलिस को सतर्क रहकर काम करना पड़ता है।
इन टीमों के सदस्य शाम 7:30 बजे एकत्र होते हैं। जरूरी निर्देश और ब्रीफिंग मिलने के बाद उन्हें अलग-अलग आयोजन स्थलों पर भेजा जाता है। कुछ जगहों पर सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष पास दिए जाते हैं, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों को गुमराह न कर सके।
इनकी ड्यूटी आमतौर पर रात दो बजे तक चलती है। हालांकि, यदि आयोजन स्थल पर भीड़ इससे बाद में खत्म होती है, तो पुलिसकर्मी उसके पूरी तरह खाली होने तक तैनात रहते हैं।
गरबा आयोजनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा में साइबर अपराधों पर निगरानी भी शामिल है। महिला पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें गलत रूप में पेश करने और लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक करने जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं।
इसी को देखते हुए सादे कपड़ों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों को उन लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, जो छिपकर महिलाओं की तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड करते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को अलग ले जाकर उचित कार्रवाई की जाती है। इसमें तस्वीरें या वीडियो हटवाना और चेतावनी देना भी शामिल हो सकता है।
इंस्पेक्टर चंद्रिका आसुंद्रा के मुताबिक, नवरात्रि की रातों में पुलिस की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। दिन के मुकाबले रात में गरबा स्थलों पर भारी भीड़ रहती है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था भी बड़े और संवेदनशील आयोजनों जैसी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सामान्य रात की ड्यूटी की तुलना में गरबा की रातें अलग अनुभव देती हैं, क्योंकि इसमें लोगों के बीच रहकर नृत्य करने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलता है।
राजकोट में भक्तिनगर पुलिस स्टेशन की ‘SHE टीम’ की कॉन्स्टेबल जागृति चावड़ा और सुजाता परमार भी वर्ष 2022 से नवरात्रि के दौरान सादे कपड़ों में ड्यूटी कर रही हैं। राजकोट सिटी महिला शाखा की इंस्पेक्टर रिकिता पाढियार के मुताबिक, वे 48 सदस्यों वाली उस टीम का हिस्सा हैं, जो शहर के 12 पुलिस थानों में तैनात है।
इन महिला पुलिसकर्मियों का काम गरबा स्थलों पर निगरानी रखने तक सीमित नहीं है। वे यह भी सुनिश्चित करती हैं कि देर रात कार्यक्रम से लौटने वाली महिलाओं को रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने में मदद की जाती है।
कॉन्स्टेबल जागृति चावड़ा के मुताबिक, महिला पुलिसकर्मी भले ही अपने परिवार के साथ नवरात्रि का उत्सव न मना पाएं, लेकिन उनकी कोशिश रहती है कि दूसरे लोग बिना किसी चिंता के त्योहार का आनंद ले सकें। ‘SHE टीमें’ गरबा स्थलों पर अपने माता-पिता से बिछड़े बच्चों को उनसे मिलाने में भी मदद करती हैं।
अहमदाबाद सिटी पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में इंस्पेक्टर निधि कलसरिया पारंपरिक कपड़ों में गरबा स्थल पर नजर आईं। वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठा कि सादे कपड़ों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों की पहचान सार्वजनिक करने से उनकी निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित तो नहीं होगा।
इस पर इंस्पेक्टर कलसरिया ने बताया कि नवरात्रि शुरू होने से पहले पुलिस आयुक्त ने मीडिया से बातचीत के दौरान टीम के सदस्यों को सार्वजनिक रूप से सामने लाया था। पुलिस ने सादे कपड़ों में तैनात कर्मचारियों की तस्वीरें और वीडियो इसलिए साझा किए, ताकि लोगों को यह संदेश दिया जा सके कि सुरक्षा के लिए पुलिस हर जगह मौजूद है।
कलसरिया के मुताबिक, कुछ लोग उन्हें पहले से पहचानते हैं, लेकिन हर व्यक्ति को यह जानकारी नहीं होती कि गरबा के दौरान भी पुलिसकर्मी आम लोगों के बीच मौजूद हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो महिलाओं को भरोसा दिलाने का माध्यम भी हैं कि पुलिस उनके साथ है और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद के लिए उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि इन वीडियो से असामाजिक तत्वों को भी संदेश मिलता है कि पुलिस की नजर उन पर है। कलसरिया के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले कई लोग उनसे मिलकर बातचीत भी करते हैं। ऐसे मौकों पर वह उन्हें समझाती हैं कि किसी भी परेशानी की स्थिति में पुलिस से संपर्क करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
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