भारतीय क्रिकेट के पूर्व कोच संजय बांगर की बेटी अनाया बांगर ने अपनी जेंडर ट्रांजिशन सर्जरी (Vaginoplasty) के बाद दुनिया को अपनी साहसी कदम से चौंका दिया है। यह सिर्फ एक शारीरिक बदलाव नहीं है, बल्कि सदियों से चले आ रहे धार्मिक पाखंडों और ‘ईश्वर की इच्छा’ के नाम पर थोपी गई रूढ़ियों पर आधुनिक विज्ञान की सबसे बड़ी जीत है।
कैसे मुमकिन है यह ‘चमत्कार’?
अनाया बांगर ने अपनी सर्जरी और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) शुरू करने से पहले ही एक फैसला लिया था स्पर्म फ्रीजिंग।

अब अनाया भविष्य में अपनी ही बायोलॉजिकल चाइल्ड करने की योजना बना रही हैं। विज्ञान की भाषा में इसे IVF और सरोगेसी का एक अनोखा संगम माना जा रहा है:
अनया के अपने ही फ्रीज किए गए स्पर्म का उपयोग होगा।एक एग डोनर के जरिए भ्रूण तैयार किया जाएगा। चूंकि सर्जरी के बाद गर्भाशय (Uterus) नहीं होता, इसलिए बच्चे को एक सरोगेट मां की कोख में विकसित किया जाएगा।
जब अनाया का बच्चा जन्म लेगा, तो कानूनी और सामाजिक रूप से अनाया उसकी ‘मां’ होंगी, लेकिन जेनेटिकली वह उस बच्चे की ‘पिता’ भी होंगी। यह आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में दर्ज होने वाला एक क्रांतिकारी मामला होगा।

क्या बदली हकीकत?
अक्सर जेंडर सर्जरी को लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है, लेकिन हकीकत ये है कि वेजिनोप्लास्टी के बाद अनाया एक महिला के तौर पर शारीरिक संबंध बनाने में पूरी तरह सक्षम होंगी।
संजय बांगर बने एक ‘सुपर डैड’
जहाँ अक्सर ऐसे मामलों में परिवार साथ छोड़ देते हैं, वहीं संजय बांगर अपनी बेटी के लिए एक ढाल बनकर खड़े रहे। उन्होंने समाज के तानों की दुहाई देने वालों को नजरअंदाज कर अपनी बेटी की मानसिक खुशी और विज्ञान पर भरोसा जताया।