लखनऊ. यूपी-बिहार से लेकर बांग्लादेश की सीमा तक फैले अवैध कफ सिरप के काले कारोबार को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. यूपी पुलिस इस नेटवर्क के खिलाफ लगातार छापेमारी कर रही है और कई गिरफ्तारियाँ भी हो चुकी हैं.
इसी बीच मामले की गूंज अब संसद तक पहुँच गई है. समाजवादी पार्टी (सपा) के आज़मगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में नकली कफ सिरप सिंडिकेट का मुद्दा उठाते हुए यूपी सरकार को कटघरे में खड़ा किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वांचल से शुरू हुआ यह अवैध कारोबार कई राज्यों तक फैल चुका है और इसके तार विदेशों तक जुड़े हैं. इन माफियाओं को करोड़ों रुपये की गाड़ियां उपहार में दी गई हैं.
उन्होंने कहा कि वो इन माफियाओं के नाम सहित पूरी लिस्ट दे सकते हैं. धर्मेंद्र यादव ने इस मुद्दे को जनहित के मामले के तहत सदन में उठाया और केंद्र व राज्य सरकार से इस पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की.
उधर, मामले में कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लाए गए कफ सिरप तस्करी के आरोपित, वाराणसी निवासी भोला प्रसाद जायसवाल को सोनभद्र पुलिस ने बुधवार दोपहर एनडीपीएस न्यायालय में पेश किया. सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपित को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया.
पूरा मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है और सपा लगातार कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है. खुद अखिलेश यादव भी इस नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं.
धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि इस रैकेट को चलाने वाले माफिया किसी विशेष जाति से जुड़े हैं और उन्हें करोड़ों रुपये की गाड़ियां उपहार में दी गई हैं. सांसद ने कहा कि उनके पास इन माफियाओं के नामों की पूरी लिस्ट मौजूद है। उन्होंने इसे जनहित का मामला बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.
सांसद धर्मेंद्र यादव ने अपने संबोधन में बताया कि यह नकली कफ सिरप का रैकेट उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र खासकर वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़ और भदोही के आसपास सक्रिय है. उन्होंने बताया कि इस सिंडिकेट के तार मध्य प्रदेश, राजस्थान, बंगाल और देश के बाहर बांग्लादेश के अलावा साउथ अफ्रीका तक फैले हुए हैं.
धर्मेंद्र यादव ने बनारस सेंट्रल बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजा आनंद ज्योति सिंह की मौत का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लगभग एक साल पहले इसी नकली कफ सिरप के कारण इनकी मौत हुई थी.
उन्होंने बताया कि मृतक की पत्नी भारती सिंह बनारस पुलिस के दर-दर भटकती रहीं, लेकिन उनकी FIR तक दर्ज नहीं हुई. मामला तब सक्रिय हुआ जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से इसे उठाया.