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अरूणाचल प्रदेश बॉर्डर पर FACE-OFF की स्थिति, ITBP के DG का बयान! कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

बर्फ से ढकी लद्दाख की चोटियों से लेकर पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक भारत और चीन सीमा पर शांति का वो कौन सा पर्दा है, जिसके पीछे टकराव की नई दास्तान लिखी जा रही है? सीमा का अस्पष्ट सीमांकन और ड्रैगन की अनवरत विस्तारवादी नीयत के बीच, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर फिर कुछ ऐसा घटा है जिसने सुरक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। आईटीबीपी (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर के अचानक आए खुलासे ने हैरान कर दिया हैं। अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर भारत और चीनी सैनिकों के बीच बार-बार ‘फेस-ऑफ’ हो रहा है और यह गतिरोध अभी थमा नहीं है। इस खुलासे के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस का हमला: ‘विश्वगुरु‘ का दावा करने वालों ने चीन को छूट दी—जयराम रमेश

ITBP प्रमुख के खुलासे के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खुद को ‘विश्वगुरु’ कहने वालों ने चीन को खुली छूट दे रखी है।

जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना (PLA) के साथ हालिया झड़पों के दौरान ITBP जवानों के साहस और प्रदर्शन की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए।

ITBP DG शत्रुजीत कपूर ने क्या किया बड़ा खुलासा?

हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने सीमा की वास्तविक स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कई बार ऐसी परिस्थितियां बनीं जब दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने (फेस-ऑफ) आ गईं और यह सिलसिला अभी भी जारी है।

उन्होंने जवानों के पराक्रम की सराहना करते हुए कहा:

“वहाँ पर तैनात हमारी शौर्य कमांडो टीमों ने बेहद शानदार काम किया है। यह एक नई पहल थी। जैसा कि हम जानते हैं, ITBP की शुरुआत एक ‘माउंटेन गुरिल्ला फोर्स’ के रूप में हुई थी। इसके बाद हमने एक परंपरागत बल के रूप में भारत-चीन सीमा की जिम्मेदारी संभाली। आज भले ही गुरिल्ला युद्ध की जरूरत न हो, लेकिन हमें एक बेहद शक्तिशाली ‘हाई ऑल्टीट्यूड फोर्स’ (उच्च पर्वतीय बल) के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करनी है।”

आखिर क्यों सुलग रही है भारत-चीन सीमा?

भारत और चीन के बीच LAC पर जारी तनाव की मुख्य वजह सीमा का स्पष्ट सीमांकन न होना और क्षेत्रीय दावों में अंतर है। करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग समझ है। लद्दाख के अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।

वहीं, चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न अंग बताता है। सीमा पर सैनिकों की तैनाती, सड़कों और सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण तथा गश्त को लेकर टकराव भी तनाव बढ़ाते हैं। इसके अलावा, ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध निर्माण और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दे दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते हैं।

Shivani Kalani

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