Trending News

फरवरी अंत में यूरोप की अर्थव्यवस्था डगमगाई, फिर भी भारतीय रुपया रहा स्थिर, आखिर क्या है पूरा करेंसी गेम?

यूरोज़ोन के फरवरी 2026 के अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि इनका भारतीय रुपये (INR) पर कोई सीधा या बड़ा असर नहीं पड़ा है। उपभोक्ता विश्वास सूचकांक -12.2 पर रहा और आर्थिक भावना में हल्की गिरावट जरूर दिखी, लेकिन भारतीय मुद्रा के लिए यह डेटा लगभग “न्यूट्रल” ही साबित हुआ। यूरोप की अर्थव्यवस्था में थोड़ी कमजोरी के संकेत जरूर हैं, पर रुपये की चाल किसी और दिशा से तय होती दिख रही है।

यूरोप का डेटा कमजोर, लेकिन बड़ा झटका नहीं

यूरोज़ोन में उपभोक्ता विश्वास जनवरी के मुकाबले थोड़ा सुधरा, लेकिन आर्थिक भावना सूचकांक 98.3 पर आ गया, जो लंबे समय के औसत 100 से नीचे है। सेवाओं और निर्माण सेक्टर में सुस्ती की वजह से रोजगार की उम्मीदें भी घटी हैं, जिससे यूरोप की रिकवरी पर हल्का सवाल खड़ा होता है। इस डेटा के बाद यूरो में मामूली कमजोरी दिखी और EUR/USD थोड़ा फिसला, लेकिन कोई बड़ा झटका नहीं आया। बाजारों को भी European Central Bank की नीति में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, और साल के अंत तक दरों में बदलाव के आसार कम ही माने जा रहे हैं।

रुपये की कहानी: USD ज्यादा अहम

भारतीय रुपये पर इस यूरोपीय डेटा का असर बेहद सीमित रहा। फरवरी 2026 में रुपये पर असली दबाव अमेरिकी डॉलर से आया। USD/INR 90.96 से 91 के आसपास बना रहा और कुछ मौकों पर 91 के स्तर को टेस्ट भी किया, जिसे Reserve Bank of India के हस्तक्षेप ने संभाल लिया।

यूरो के मुकाबले रुपया भी काफी हद तक स्थिर रहा। फरवरी के आखिरी दिनों में EUR/INR करीब 107.3–107.5 के दायरे में ट्रेड करता दिखा। यूरो की हल्की कमजोरी से रुपये के मजबूत होने की संभावना जरूर बनी, लेकिन डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों (FII) की निकासी जैसे फैक्टरों ने इसे बैलेंस कर दिया।

कुल तस्वीर क्या कहती है?

27 फरवरी 2026 के आसपास देखें तो USD/INR 90.96–91 के बीच स्थिर है और RBI की सतर्कता से 91 के ऊपर टिक नहीं पा रहा। EUR/INR भी करीब 107.4 के आसपास घूम रहा है, बिना किसी बड़े उतार-चढ़ाव के। कुल मिलाकर, यूरोज़ोन का यह डेटा रुपये के लिए न तो बड़ा पॉजिटिव रहा और न ही बड़ा नेगेटिव। रुपये की दिशा अभी भी अमेरिकी डॉलर की ताकत, तेल की कीमतों, FII फ्लो और RBI की रणनीति से तय हो रही है।

आगे अगर यूरोज़ोन में कमजोरी और बढ़ती है या ECB ज्यादा ढील देता है, तो यूरो और कमजोर हो सकता है और EUR के मुकाबले रुपया थोड़ा मजबूत दिख सकता है। लेकिन जब तक डॉलर मजबूत बना रहता है, तब तक रुपये पर उसका दबाव बना रहेगा और यही सबसे बड़ा गेम-चेंजर रहेगा।

news desk

Recent Posts

वाराणसी की ‘मसान होली’ 2026: जलती चिताओं के बीच राख से होली का रोमांच, जानें 2026 की तिथि और मिस्ट्री!

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी, जहाँ मृत्यु को भी मंगल माना जाता है, एक…

10 hours ago

Afghanistan-Pakistan तनाव के बीच फिर चर्चा में डूरंड लाइन, जानिए 133 साल पुरानी लकीर कैसे बनी टकराव की वजह

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस समय तनाव चरम पर बताया जा रहा है। सीमावर्ती…

11 hours ago

POCSO केस में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

प्रयागराज/इलाहाबाद, 27 फरवरी – प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज POCSO मामले में ज्योतिषपीठ के…

12 hours ago

रश्मिका-विजय की ड्रीमी वेडिंग की पहली तस्वीरें आईं सामने; मांग में सिंदूर और लाल जोड़े में नजर आईं ‘नेशनल क्रश’

आखिरकार करोड़ों फैंस का इंतजार खत्म हुआ! साउथ सिनेमा के सबसे चर्चित और चहेते कपल…

14 hours ago

1хбет: Защита Вашей Личной Информации

1хбет: Защита Вашей Личной ИнформацииВ современном digital-мире, безопасность личной информации становится одной из самых актуальных…

14 hours ago