सियासी

90 हजार पेट्रोल पंपों पर अब सिर्फ E20 फ्यूल, उपभोक्ता परेशान… गडकरी पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

देश में इन दिनों  इथेनॉल-पेट्रोल  को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जहां एक ओर सरकार ने 2030 तक 20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के लक्ष्य को तय समय से पहले ही देशभर में लागू कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर अब इसका केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से सीधा कनेक्शन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू हो गया है.

क्या है E20 का गडकरी से कनेक्शन ?

केंद्र सरकार में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की इथेनॉल और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने में सबसे प्रमुख भूमिका मानी जाती है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के तौर पर उन्होंने लगातार यह तर्क दिया कि भारत को पेट्रोल-डीज़ल पर निर्भरता कम करनी चाहिए और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियाँ लानी चाहिए, जो 100% इथेनॉल या मिश्रित ईंधन से चल सकें.

इसके अलावा, गडकरी कई बार मंचों पर यह भी कहते रहे कि पेट्रोलियम मंत्री उनकी सलाह पर ध्यान नहीं देते, लेकिन वे खुद इथेनॉल और ग्रीन फ्यूल को आगे बढ़ाएँगे. इस तरह उनके बयानों और पारिवारिक कारोबार को लेकर इथेनॉल-पेट्रोल विवाद में उनका नाम जुड़ गया है.

यही वजह है कि जब केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025 कर दिया, तो विवाद खड़ा हो गया.

विपक्ष का आरोप

विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस नीति से गडकरी परिवार की कंपनियों को सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि उनके बेटों की कंपनियाँ जैसे Manas Agro Industries और CIAN Agro Industries इथेनॉल और बायोफ्यूल सेक्टर में सक्रिय हैं. ऐसे में नीति-निर्माण में हितों के टकराव (conflict of interest) की बात उठाई जाने लगी.

यानी E5 या E10 पेट्रोल मिलना बंद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब पेट्रोल पंपों पर पुराना E5 या E10 पेट्रोल मिलना बंद हो गया है और देश के लगभग 90,000 पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन ही उपलब्ध है, जिससे आम लोग और उपभोक्ता संगठनों  इसके खिलाफ आवाज रहें हैं.

वाहन चालकों की ओर से लगातार शिकायतें आ रहीं हैं कि E20 पेट्रोल से उनकी गाड़ियों का माइलेज घट गया है.  उनका दावा है कि उनके वाहन में पहले की तुलना में अब औसतन 6 से 8 प्रतिशत तक ज्यादा पेट्रोल खपत हो रही है. इसके अलावा, पुरानी गाड़ियों के लिए भी यह ईंधन तकनीकि रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर लोगों में गहरी नाराज़गी है.

सरकार का क्या कहना है?

दूसरी ओर, सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां इन आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मानती हैं. SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) का कहना है कि E20 से माइलेज में केवल 2 से 4 प्रतिशत तक की कमी होती है और अब तक किसी वाहन में गंभीर नुकसान दर्ज नहीं हुआ है.

वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इंश्योरेंस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और यदि पुरानी गाड़ियों में किसी पार्ट को बदलने की जरूरत भी पड़ती है, तो वह सस्ता और आसान समाधान है. मंत्रालय के मुताबिक, E20 पेट्रोल से कार्बन उत्सर्जन में 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी और यह जलवायु परिवर्तन से लड़ने में बड़ा कदम है.

news desk

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