नई दिल्ली: सर्दियों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार 1 नवंबर से बड़ा कदम उठाने जा रही है। विंटर एक्शन प्लान के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली में दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड उन गाड़ियों के प्रवेश पर रोक लगाने की तैयारी है, जो BS-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करतीं। इसका असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से रोजाना दिल्ली आने वाले वाहन चालकों पर पड़ सकता है।
इस नियम के लागू होने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी कार या बाइक किस उत्सर्जन मानक के तहत आती है। अगर आपकी गाड़ी BS-3 या BS-4 श्रेणी की है और दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड है, तो प्रस्तावित प्रतिबंध के दौरान राजधानी में प्रवेश को लेकर परेशानी हो सकती है। दोपहिया वाहनों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जानिए किन गाड़ियों पर असर पड़ सकता है, BS-6 मानक कैसे चेक करें और दिल्ली में रजिस्टर्ड पुरानी गाड़ियों के लिए क्या नियम बताए गए हैं।
दिल्ली सरकार के इस कदम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR में बड़ी संख्या में वाहन प्रभावित हो सकते हैं। परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में 10 लाख से ज्यादा ऐसी गाड़ियां हैं, जो BS-6 मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद में मिलाकर लगभग 2 लाख गाड़ियां इस श्रेणी में आती हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत वाहन BS-3 और BS-4 मानकों वाले बताए गए हैं। अनुमान के अनुसार, इन दोनों जिलों में लगभग 50 हजार व्यावसायिक वाहन भी BS-6 मानकों को पूरा नहीं करते।
उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 4 लाख से ज्यादा ऐसी गाड़ियां होने का अनुमान है, जो BS-6 मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इनमें आधे से ज्यादा वाहन BS-4 श्रेणी के बताए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से पेट्रोल से चलने वाली कारें शामिल हैं।
वहीं, परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद में भी लगभग 4 लाख ऐसी गाड़ियां हैं, जो BS-6 मानकों को पूरा नहीं करतीं। ऐसे में दिल्ली में नौकरी, कारोबार या दूसरे कामों के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों को अपने वाहन का उत्सर्जन मानक जरूर जांच लेना चाहिए।
प्रस्तावित प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ने की आशंका है, जो NCR के शहरों से अपनी गाड़ियों के जरिए रोजाना दिल्ली आते हैं। इनमें नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और व्यावसायिक वाहन चलाने वाले शामिल हैं।
BS-6 भारत में वाहनों के लिए लागू उत्सर्जन मानकों की एक श्रेणी है। इन मानकों के तहत इंजन से निकलने वाले प्रदूषकों की मात्रा पर सीमा तय की जाती है। पुराने उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियों से प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार अलग-अलग कदम उठाती रही है।
नियमों को लागू करने के लिए दिल्ली की सीमाओं और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर निगरानी मजबूत करने की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, बॉर्डर चेकपॉइंट और प्रमुख रास्तों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
ये कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़कर उनकी पहचान करने में मदद करेंगे। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरों के जरिए भी राजधानी में आने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी। रिपोर्ट में नियमों को लागू कराने के लिए प्रवर्तन टीमों के करीब 300 कर्मचारियों की तैनाती का भी उल्लेख किया गया है।
अपनी गाड़ी का उत्सर्जन मानक जानने के लिए आप ये तरीके अपना सकते हैं:
ध्यान रखें कि सिर्फ गाड़ी के पेट्रोल, डीजल या सीएनजी से चलने के आधार पर उसका BS मानक तय नहीं किया जा सकता। वाहन का मॉडल, निर्माण और संबंधित दस्तावेज देखना जरूरी है।
हां, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयान के मुताबिक, यह प्रतिबंध पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले सभी तरह के वाहनों पर लागू होगा। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों को भी अपनी बाइक या स्कूटर का उत्सर्जन मानक जांच लेना चाहिए।
अगर आपका वाहन दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड है और BS-6 मानकों को पूरा नहीं करता, तो 1 नवंबर से प्रस्तावित प्रतिबंध के दौरान दिल्ली में प्रवेश करने से पहले लागू नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।
बाहर के राज्यों में रजिस्टर्ड और BS-6 मानकों को पूरा नहीं करने वाली गाड़ियों के दिल्ली में प्रवेश करने पर पकड़े जाने की स्थिति में क्या कार्रवाई होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित रिपोर्ट में नहीं दी गई है। इसलिए वाहन चालकों को जुर्माने या किसी अन्य कार्रवाई के बारे में बिना आधिकारिक पुष्टि के कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
दिल्ली में प्रवेश करने से पहले सरकार या परिवहन विभाग की ओर से जारी ताजा निर्देशों की जांच करना बेहतर होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में रजिस्टर्ड ऐसी गाड़ियों के लिए वैध PUCC यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जरूरी है, जो BS-6 से पुराने मानकों वाली हैं। वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होने पर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी उपलब्ध कराने पर रोक से जुड़ा नियम लागू हो सकता है।
इसलिए दिल्ली में रहने वाले वाहन मालिकों को भी अपने वाहन का PUCC समय रहते जांच लेना चाहिए। साथ ही, दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड गाड़ियों और दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों पर लागू नियमों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
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