‘घर नहीं नहीं जाउंगा मैं, Essel World में रहूंगा मैं’ भारत में 90s के बच्चे या किशोर टीवी पर इस एड को देखते तो उनके भीतर इस मनोरंजन पार्क में मस्ती करने की जबरदस्त चाहत पैदा हो जाती. मोगली, Essel World या टॉम जेरी अब 90s की यादों का सुनहरा हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन जापान में कार्टून कैरेक्टर न सिर्फ यादों में गुनगुनाते हैं बल्कि बाजार का हिस्सा बन कर देश की जीडीपी में मजबूती भी दे रहे हैं. जापान की कार्टून इंडस्ट्री की कहानी एक दिलचस्प और गुदगुदाने वाला सफर है.
अगर आप टोक्यो की नीयन लाइटों से जगमगाती सड़कों पर टहल रहे हों, तो डोरेमॉन के खिलखिलाते चेहरे, पिकाचु की मासूमियत और शिनचैन की शरारतें हर तरफ से आपको झांकती नज़र आएंगी. मॉल्स की चमचमाती शेल्फ़ों से लेकर थीम पार्कों की रंगीन गलियों तक, ये कैरेक्टर्स सिर्फ़ खिलौने नहीं, बल्कि जापान की पहचान और आकर्षण का हिस्सा हैं.
कभी बच्चों की दुनिया तक सीमित रहे ये कार्टून आज देश की सॉफ्ट पावर और टूरिज़्म की ताक़त बन चुके हैं. और ऐसा सिर्फ जापान तक सीमित नहीं है. अगर चीन की बात करें तो बीजिंग भी पीछे नहीं है. आज शंघाई के मॉल गुलाबी, भूरे टेडी बियर बुबु और डूडू के सॉफ्ट टॉयज़ से भरे पड़े हैं, जिन्हें बच्चे ही नहीं, बड़े भी शौक़ से खरीद रहे हैं. एशिया के इन दो देशों की रचनात्मकता आज पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की धड़कन बन चुकी है.
डोरेमॉन और शिनचैन बने जापान में टूरिस्टों की पहली पसंद
आज कार्टून फिल्मों के रंग-बिरंगे प्यारे कैरेक्टर्स सिर्फ़ इंटरटरनेट पर ही नहीं रह गये हैं, बल्कि जापान और चीन जैसे देशों की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और वैश्विक पहचान का अहम हिस्सा बन चुके हैं. क्योंकि ये सिर्फ टीवी की दुनिया में नहीं नहीं सिमटे हैं. ट्वायज औऱ कॉमिक्स के जरिए ये खरीददारी की मांग को नये मुकाम तक पहुंचा चुके हैं.
जापान की अर्थव्यवस्था में तो एनिमे इंडस्ट्री का अच्छा खासा प्रभाव है. डोरेमॉन का डोरेमॉबिल, पोकेमॉन के पिकाचु-चार्मेंडर फिगर्स और शिनचैन की कॉमिक्स ने जापान के खिलौना उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2023 में जापानी एनिमे इंडस्ट्री ने लगभग 3.3 ट्रिलियन येन (करीब 21 अरब अमेरिकी डॉलर) की कमाई की थी और इसका जीडीपी में हिस्सा 0.5% रहा था. इसी के साथ ऐनिमे और मंगा से जुड़ी मर्चेंडाइज़ जैसे फ़िगर, खिलौने, कपड़े, स्टेशनरी आदि का सालाना बाजार बढ़ते हुए 2 से 3 ट्रिलियन येन तक पहुंच चुका है.
ऐनिमे टूरिस्ट प्लेसों से अरबों की कमाई
छोटे-छोटे फिगर्स और कलेक्टिबल आइटम्स जापान की क्रिएटिव इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं, यही वजह है कि आज जापान ने ऐनिमे को केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रखा. डोरेमॉन के कैमरा स्टेशनों से लेकर पोकेमॉन कैफ़े और शिनचैन थीम शॉप्स तक, विदेशी पर्यटक इन जगहों पर खिंचे चले आते हैं. 2023 के एक सर्वे के मुताबिक़, लगभग 8–10% विदेशी पर्यटक अपने टूर प्लान में ऐनिमे-लोकेशन्स को शामिल करते हैं.
2018 में जापान ने “88 Anime Tourism Sites” की सूची बनाई थी, जो ऐनिमे फैंस के बीच खूब लोकप्रिय हुआ. Studio Ghibli Museum, Universal Studios Japan की ऐनिमे थीम राइड्स और इवेंट्स अब अरबों डॉलर की पर्यटन कमाई का स्रोत हैं.
इंस्टाग्राम के क्यूट बुबु-डूडू बने चीन की टॉय इंडस्ट्री की पहली पसंद
दूसरी ओर, आज के यूथ में इंस्टाग्राम पर तेजी से फेमस हो रहे गुलाबी और भूरे रंग के क्यूट-कपल बुबु-डूडू चीन की टॉय इंडस्ट्री को और समृद्ध कर रहे हैं. लेकिन यह छोटा प्रतिशत गहरी ताक़त रखता है. भालू के प्रतीक बुबु डूडू सोशल मीडिया पर वायरल होकर चीन की टॉय इंडस्ट्री को नए चेहरों में बदल गए. ये सिर्फ़ इमोजी और गिफ़ तक सीमित नहीं, बल्कि टेडी-बियर टॉयज़ की-चेन, मोबाइल कवर और स्टेशनरी की भारी बिक्री का कारण बन गए हैं.
चीन में ट्रेडीशनल खिलौनों से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक, इंटरैक्टिव और एजुकेशनल टॉयज़ की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है. इसके लिए बुबु-डूडू ब्रांडेड स्मार्ट टॉयज़ बच्चों को कहानियां सुनाते हैं, सवालों के जवाब देते हैं और बेसिक इंग्लिश-मैथ सिखाते हैं. इस तरह “टेडी बियर” अब डिजिटल युग के लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स बन चुके हैं.

कार्टून कैरेक्टर बने, एशियाई रचनात्मक शक्ति के प्रतीक
चीन हर साल अरबों डॉलर के खिलौने अमेरिका, यूरोप और एशिया में निर्यात करता है. “Made in China” टॉयज़ का दबदबा पहले से ही है, लेकिन बुबु डूडू जैसे कैरेक्टर्स ने इस एक्सपोर्ट को और मज़बूत किया है. अक्सर कोई कैरेक्टर सोशल मीडिया पर वायरल होता है और फिर उस पर आधारित टॉयज़ वैश्विक बिज़नेस का हिस्सा बन जाते हैं.
जापान ने “Cool Japan” पहल से ऐनिमे और मंगा को वैश्विक ब्रांड बनाकर अपनी सॉफ्ट पावर मज़बूत की है. Netflix और Crunchyroll जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स पर ऐनिमे की पहुंच ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को कई गुना बढ़ा दिया. दूसरी ओर, चीन बुबु डूडू जैसे प्यारे कैरेक्टर्स से युवाओं को जोड़कर खिलौनों और मर्चेंडाइज़ को सांस्कृतिक ताक़त बना रहा है. चाहे पिकाचु हो या बुबु डूडू, ये कैरेक्टर्स सिर्फ़ बच्चों के खिलौने नहीं, बल्कि रोजगार, निर्यात और वैश्विक पहचान के स्तंभ हैं. डोरेमॉन की जादुई जेब और बुबु डूडू की क्यूटनेस, रचनात्मक शक्ति और आर्थिक चमक का नया प्रतीक बन चुकी है.