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ग्रीनलैंड और टैरिफ विवाद के बीच दावोस में ट्रंप को खुली चुनौती, मैक्रों बोले– “यह गुंडागर्दी है”, कनाडा भी साथ आया

दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) के सालाना सम्मेलन में इस बार माहौल कुछ ज्यादा ही गर्म नजर आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग और यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकियों ने यूरोप और उसके सहयोगी देशों को खुलकर बोलने पर मजबूर कर दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्ने ने दावोस के मंच से ट्रंप की नीतियों पर तीखा हमला बोला और इसे खुली “गुंडागर्दी” करार दिया। सम्मेलन में पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि ट्रंप के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट विरोध की आवाज उठ रही है।

‘सबसे ताकतवर का कानून’ मंजूर नहीं

मैक्रों ने अपने भाषण में ट्रंप की टैरिफ धमकियों को “पागलपन” बताते हुए कहा कि यूरोप किसी भी सूरत में “सबसे ताकतवर के कानून” के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अब व्यापार को हथियार बनाकर यूरोप को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और ग्रीनलैंड जैसे मामलों में टैरिफ का इस्तेमाल क्षेत्रीय संप्रभुता पर दबाव डालने के लिए किया जा रहा है। मैक्रों ने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो यूरोपीय संघ अपनी ‘एंटी-कोर्शन इंस्ट्रूमेंट’, जिसे ‘ट्रेड बाजूका’ भी कहा जाता है, का इस्तेमाल कर सकता है। यह पहली बार होगा जब ईयू अमेरिका के खिलाफ इतना सख्त कदम उठाने पर विचार करेगा। उन्होंने साफ कहा कि यूरोप गुंडागर्दी नहीं, बल्कि सम्मान, विज्ञान और कानून के राज में विश्वास करता है।

मैक्रों ने इसी दौरान चीन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चीन की अत्यधिक उत्पादन क्षमता और विकृत व्यापार प्रथाएं यूरोपीय उद्योगों के लिए खतरा बन रही हैं। मैक्रों का कहना था कि यूरोप चीन के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसे सिर्फ सब्सिडी वाला निर्यात नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, तकनीकी साझेदारी और यूरोपीय मानकों का पालन चाहिए।

पुरानी विश्व व्यवस्था खत्म, नई अनिश्चितता शुरू

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्ने ने दावोस में कहा कि पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब वापस नहीं आने वाली है और दुनिया एक बड़े “टूटन” के दौर से गुजर रही है। उन्होंने अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों पर आरोप लगाया कि वे आर्थिक एकीकरण को हथियार, टैरिफ को दबाव और सप्लाई चेन को कमजोरी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कार्ने ने चेतावनी दी कि ट्रंप की नीतियां दुनिया को “किले जैसी” व्यवस्था की ओर ले जा रही हैं, जहां हर देश खुद को बचाने में लग जाएगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था और कमजोर होगी। उन्होंने मध्यम ताकत वाले देशों से एकजुट होने की अपील की और अमेरिका से कनाडा की “दोस्ती खत्म” होने की बात दोहराई।

इस बीच ट्रंप ने दावोस पहुंचने से पहले ही सोशल मीडिया पर मैक्रों को निशाना बनाते हुए फ्रेंच वाइन पर 200 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दे दी। उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर पीछे न हटने का भी ऐलान किया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इन बयानों को “गलती” बताते हुए कहा कि ऐसे कदम ट्रांसअटलांटिक रिश्तों को और नुकसान पहुंचाएंगे। कुल मिलाकर, दावोस 2026 ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने वैश्विक राजनीति और व्यापार दोनों में नई दरारें पैदा कर दी हैं। जानकार मानते हैं कि यह सम्मेलन दुनिया को एक नई भू-राजनीतिक हकीकत की झलक दे गया है, जहां पुराने साझेदार भी अब खुलकर आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं।

Gopal Singh

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