हैदराबाद/गुवाहाटी। तेलंगाना हाई कोर्ट ने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए एक हफ्ते की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है।
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर (FIR) से संबंधित है। अदालत ने खेड़ा को संबंधित निचली अदालत में पेश होने और आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए सात दिनों का समय दिया है।
हाई कोर्ट की सुनवाई और दलीलें
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) लीगल सेल के अशोक गौड़ के अनुसार, पवन खेड़ा ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए याचिका दायर की थी। कोर्ट में खेड़ा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया।
बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें
संवैधानिक काउबॉय: सिंघवी ने असम सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को ‘संवैधानिक काउबॉय’ की संज्ञा दी।
- हैदराबाद का निवास: दलील दी गई कि पवन खेड़ा वर्तमान में हैदराबाद में अपनी पत्नी के साथ रह रहे हैं, जो यहीं की निवासी हैं और चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
- गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं: सिंघवी ने तर्क दिया कि खेड़ा कोई आदतन अपराधी या भगौड़े नहीं हैं, बल्कि समाज में एक प्रतिष्ठित राजनेता हैं, इसलिए मानहानि जैसे मामले में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।
असम सरकार का विरोध: ‘फर्जी दस्तावेजों’ का आरोप
असम के महाधिवक्ता (AG) देवजीत सैकिया ने पवन खेड़ा की याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने याचिका की विचारणीयता (Maintainability) पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना और एफआईआर असम की है, खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, फिर तेलंगाना में जमानत की अर्जी देना कानूनी रूप से संदिग्ध है।
सरकारी पक्ष के गंभीर आरोप
- फर्जी आधार कार्ड: महाधिवक्ता ने आरोप लगाया कि खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट को गुमराह करने के लिए फर्जी आधार कार्ड का सहारा लिया है।
- गंभीर धाराएं: खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 175 (चुनाव में झूठा बयान), 35 और 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज है।
- महिला की गरिमा: सैकिया ने कहा कि शिकायतकर्ता एक महिला हैं और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ पवन खेड़ा का वह बयान है जो उन्होंने 5 अप्रैल को दिया था। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में संपत्तियां हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में छिपाया है। इन आरोपों के बाद रिनिकी शर्मा ने खेड़ा के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया।
तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली एक हफ्ते की राहत के बाद पवन खेड़ा को अब असम की संबंधित अदालत में आवेदन करना होगा। इस दौरान उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।