लखनऊ: कांग्रेस ने शनिवार को एलआईसी (LIC) के करीब 33,000 करोड़ रुपये के अडानी समूह में निवेश को मोदी सरकार की “मोबाइल फोन बैंकिंग” बताते हुए गंभीर आरोप लगाये. पार्टी ने दावा किया कि सरकार ने एक ऐसी कंपनी की मदद की, जो गंभीर आपराधिक आरोपों के चलते वित्तीय संकट में थी. कांग्रेस ने संसद की सार्वजनिक लेखा समिति (PAC) से इस मामले की जांच की मांग की है, यह जानने के लिए कि एलआईसी को इस निवेश के लिए कैसे “जबरन” बाध्य किया गया. अंदरूनी दस्तावेज़ बताते हैं कि मई 2025 में अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को पास किया और इसका मकसद अडानी समूह में “विश्वास का संकेत देना” और “अन्य निवेशकों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करना” था.
कांग्रेस का आरोप ! पीएम मोदी के करीबी हुए लाभार्थी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि SBI के 2023 में अडानी एफपीओ में 525 करोड़ रुपये निवेश का भी जवाब चाहिए. उनका आरोप है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का असली फायदा आम लोगों को नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के “नज़दीकी मित्रों” को हुआ. खड़गे ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आम मिडिल क्लास व्यक्ति जानता है कि मोदी उनके मेहनत के पैसों का इस्तेमाल अडानी को बचाने में कर रहे हैं? क्या यह विश्वास का उल्लंघन नहीं है?”
“मोदानी मेगा स्कैम की पड़ताल जरूरी“– कांग्रेस
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह मामला सिर्फ LIC के निवेश तक सीमित नहीं है. उन्होंने मोदी सरकार और अडानी समूह पर एलआईसी और 30 करोड़ पॉलिसीधारकों की बचत का “सिस्टमेटिक दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया. रमेश ने कहा कि इसमें केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग, निजी कंपनियों को अडानी को बेचना, बुनियादी ढांचे का rigged निजीकरण, विदेशों में अनुबंध देने और coal के over-invoicing जैसे कई मामले शामिल हैं. कांग्रेस का कहना है कि इस “मोदानी मेगा स्कैम” की पूरी जांच केवल एक संयुक्त संसदीय समिति कर सकती है.