दिल्ली से आज एक बड़े और लंबे समय से चल रहे मामले में अहम फैसला सामने आया है। कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े केस में विशेष सीबीआई अदालत ने कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेन्द्र दर्डा और पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
यह फैसला विशेष सीबीआई जज सुनेना शर्मा ने करीब 11 साल तक चले लंबे ट्रायल के बाद सुनाया। अदालत ने साफ कहा कि जांच एजेंसी (CBI) अपने आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही और पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी।
क्या था पूरा मामला
यह केस महाराष्ट्र के बांदर कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। सीबीआई का आरोप था कि इस आवंटन में गड़बड़ी हुई और करीब 24.60 करोड़ रुपये की रिश्वत का लेन-देन हुआ। लेकिन कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कोयला ब्लॉक का आवंटन एक नीतिगत फैसला था, जो उच्चस्तरीय समिति और प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के अनुसार लिया गया था।
अदालत ने यह भी माना कि विजय दर्दा ने सांसद होने के नाते अपने क्षेत्र के विकास के लिए कुछ सामान्य पत्र जरूर लिखे थे, लेकिन उन पत्रों का आवंटन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ा। यानी सीधे तौर पर उनका कोई रोल साबित नहीं हुआ।
कोर्ट ने क्या कहा
फैसले में कोर्ट ने खास तौर पर कहा कि एचसी गुप्ता के खिलाफ तो कोई ठोस सबूत ही नहीं मिला, इसलिए उन्हें सम्मानजनक बरी किया गया। वहीं, जब आवंटन में विजय दर्दा की भूमिका ही साबित नहीं हुई, तो रिश्वत के आरोप का आधार भी अपने आप खत्म हो जाता है।
कोर्ट की टिप्पणी काफी सख्त रही—उसने कहा कि CBI इस केस में आरोप साबित करने में “मिजरेबली फेल” रही।
फैसले का असर
इस फैसले के बाद कोयला घोटाले से जुड़े कई पुराने मामलों पर फिर से बहस शुरू हो सकती है। 11 साल तक चले इस केस में आखिरकार सभी आरोपियों को राहत मिल गई है।
इस मामले में मनोज कुमार जयसवाल को भी बरी कर दिया गया है। कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ आरोपियों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है।