रोशनी और धन के महापर्व दीपावली की तैयारियां जोरों पर हैं। हर घर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के स्वागत के लिए नए कपड़े, मिठाइयां और सजावट का सामान लाया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली पूजन के लिए घर लाई जाने वाली लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति को लेकर वास्तु शास्त्र में कुछ बेहद कड़े और खास नियम बताए गए हैं? जरा सी लापरवाही या गलत मूर्ति का चुनाव आपकी सुख-समृद्धि पर भारी पड़ सकता है। आखिर कैसी होनी चाहिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, किस धातु की प्रतिमा से घर में टिकेगी बरकत और मंदिर में उन्हें स्थापित करने का सही तरीका क्या है? आइए जानते हैं वास्तु और धर्म के जानकारों से जुड़ी हर एक खास बात।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर घर के मंदिर के लिए मां लक्ष्मी और गणेश जी की अलग-अलग तथा बैठी हुई अवस्था वाली मूर्तियां शुभ मानी जाती हैं। गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी होनी चाहिए, जिसे वाममुखी कहा जाता है।
वहीं, दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा के विशेष नियम माने जाते हैं। दोनों की मूर्तियां एक-दूसरे से अलग हों, आपस में जुड़ी हुई न हों। मां लक्ष्मी का कमल के फूल पर विराजमान होना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी प्रतिमाएं घर में सुख-समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक होती हैं।
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियों के लिए अलग-अलग धातुओं और सामग्रियों का विशेष महत्व है। मिट्टी या टेराकोटा की मूर्तियां पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती हैं। पीतल और तांबे की प्रतिमाओं को सकारात्मक ऊर्जा व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
वहीं, सफेद संगमरमर की मूर्तियां शांति और पवित्रता दर्शाती हैं। चांदी और सोने की प्रतिमाओं को भी बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन्हें एक बार स्थापित करने के बाद लंबे समय तक पूजा में रखा जा सकता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियों को सही दिशा और क्रम में स्थापित करना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे उत्तम माना गया है। वहीं, मूर्तियों की स्थापना करते समय दाएं-बाएं के क्रम का विशेष ध्यान रखें।
मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश के दाईं ओर मां लक्ष्मी की प्रतिमा होनी चाहिए। यानी जब आप मंदिर के सामने खड़े होकर देखें, तो आपकी बाईं ओर गणेश जी और दाईं ओर मां लक्ष्मी विराजमान हों।
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ उनकी मूर्तियों का चुनाव और स्थापना भी विशेष महत्व रखती है। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मूर्ति की मुद्रा, धातु, सूंड की दिशा और स्थापना का सही क्रम सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में दिवाली पूजन के लिए मूर्ति खरीदते और स्थापित करते समय इन पारंपरिक नियमों का ध्यान रखें और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी व गणेश जी का स्वागत करें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक और वास्तु शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पूजा-पाठ से जुड़े नियमों में क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।
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