नई दिल्ली। नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सियासत और विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच पर्दे के पीछे हुई उच्चस्तरीय बातचीत से जुड़े कई बड़े खुलासे हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का विकल्प दिया था, लेकिन सीजेपी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
पेपर लीक विवाद को शांत करने और प्रदर्शनकारियों को मनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से दो वरिष्ठ मंत्रियों—जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को बातचीत की कमान सौंपी गई थी।
सीजेपी का रुख: “हम किसी तरह के राजनीतिक समझौते के मूड में नहीं हैं। जब तक शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक कोई बीच का रास्ता मंजूर नहीं होगा।”
सूत्रों के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने सरकार के ‘विभाग बदलने’ वाले फॉर्मूले को बिना देर किए खारिज कर दिया। उनकी एक ही दो टूक मांग थी—पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा।
तीसरे दौर की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक कुछ देर पहले धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद शिक्षा विभाग का प्रभार बदल गया। सीजेपी के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र और विपक्षी संगठन इस मामले में किसी भी तरह के विकल्प या प्रशासनिक लीपापोती को स्वीकार करने के मूड में नहीं थे।
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