नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट के बाद विवाद अब शिकायतों और संभावित कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है।
पिछले 24 घंटे में CEC के खिलाफ दो अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को पत्र लिखकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।
पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर लोकसभा सीट से TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह कदम उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और दो अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट के बाद उठाया है।
महुआ मोइत्रा इससे पहले सोशल मीडिया पर भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुकी हैं और CEC के इस्तीफे की मांग कर चुकी हैं।
हालांकि, पुलिस में शिकायत दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप के साबित होने या FIR दर्ज होने के बराबर नहीं है। आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को पत्र लिखकर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी।
पत्र में उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने Contempt of Courts Act, 1971 की संबंधित धाराओं और सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नियमों का उल्लेख किया है।
यहां यह समझना जरूरी है कि अटॉर्नी जनरल से अनुमति मांगना और अदालत द्वारा अवमानना की कार्यवाही शुरू करना दो अलग-अलग चरण हैं। फिलहाल सामने आया कदम अनुमति मांगने तक सीमित है।
23 सितंबर को The Indian Express की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर, Form-6 में बदलाव, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने और SIR से जुड़े कुछ फैसलों का उल्लेख किया गया।
इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग टिप्पणियां और सुझाव निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इसलिए रिपोर्ट में सामने आई 14 आपत्तियों को सीधे तौर पर चुनाव आयोग के किसी फैसले के अवैध साबित होने के प्रमाण के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। यह दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों और आयोग के आधिकारिक पक्ष—दोनों को अलग-अलग समझने का मामला है।
CEC के खिलाफ सामने आए दोनों कदम फिलहाल अलग-अलग प्रक्रियाओं में हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील की शिकायत में अटॉर्नी जनरल की अनुमति महत्वपूर्ण होगी, जबकि महुआ मोइत्रा की पुलिस शिकायत पर दिल्ली पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।
इस बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दल CEC के इस्तीफे और SIR पर रोक जैसी मांगें उठा रहे हैं, जबकि आयोग अपने फैसलों का बचाव कर रहा है।
युगल में भी यूपी की जोड़ियां आमने-सामने, दोनों वर्गों के फाइनल शुक्रवार को लखनऊ ।…
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR…
जब मायानगरी के सितारे अपनी आगामी फिल्मों के प्रचार के लिए जमीन से जुड़ते हैं,…
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक…
जैसे-जैसे सितंबर का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रहा है, वैसे-वैसे देश के आम…
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के 27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च से पहले राजधानी में सुरक्षा और स्वास्थ्य…