पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझान सबको चौंका रहे हैं. महागठबंधन पूरी तरह से बिखर गया है और तेजस्वी यादव की रणनीति फेल हो गई है, जबकि नीतीश कुमार ने एक बार फिर जनता के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. लेकिन राजनीति में जो सामने दिखता है, पर्दे के पीछे भी वही हो.
भले ही चुनावी रूझान एनडीए के पक्ष में दिख रहा है लेकिन एनडीए के भीतर भी मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे गतिरोध से इंकार नहीं किया जा सकता है.
तभी एनडीए की दिखती जीत के बीच इस बात की चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या नीतीश कुमार बिहार में अगले सीएम बनेंगे. क्या बीजेपी अकेले ही बिहार में सरकार बना सकती है. एनडीए ने ताजा रुझानों में कुल 200 सीटों पर पकड़ बनाई है, जिसमें जेडीयू 80, बीजेपी 90, चिराग पासवान की पार्टी 21, माझी की पार्टी 5 और आरएलएम 4 सीटों पर आगे हैं. इन आंकड़ों के ये साफ है कि बिना नीतीश कुमार के भी बीजेपी बाकी सहयोगियों के साथ 122 के बहुमत के आंकड़े को छू रही है लेकिन नीतीश कुमार विपक्ष के साथ जाकर भी सरकार बना पाने की स्थिति में नहीं हैं।
बिना नीतीश कुमार के ही बीजेपी के सरकार बनाने की चर्चा इसलिए भी जोर पकड़ने लगी है क्योंकि चुनाव के बीच में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल करेगा.
इसके बाद जेडीयू के सांसद लल्लन सिंह ने भी यही बात दोहराई थी. और अब जब आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो जेडीयू के बिना भी बीजेपी अन्य सहयोगियों की मदद से 122 के बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच रही है. तो ऐसी परिस्थिति में नीतीश कुमार के सीएम पद की जिद को बीजेपी कितना भाव देगी?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीजेपी अकेले चलती है और जेडीयू के अलावा अन्य दलों (चिराग, माझी, आरएलएम) के साथ उसका गठबंधन है, ऐसे में बहुमत का आंकड़ा आसानी से छू सकती है. यह वही रणनीति है जो उसने महाराष्ट्र में अपनाई थी.
“शिंदे पर पहले दबाव बनाकर उन्हें किनारे कर दिया गया था, और ऐसा ही खेल यहां भी आजमाया जा सकता है.”जैसा शिंदे के मामले में हुआ था, उन्हें किनारे करने के लिए दबाव बनाया गया, वही रणनीति यहां भी इस्तेमाल हो सकती है.
“शिंदे के खिलाफ अपनाई गई दबाव वाली रणनीति को यहां भी लागू किया जा सकता है. अंतिम फैसला चुनाव परिणामों के बाद ही सामने आएगा.