नई दिल्ली: सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में 4.83 प्रतिशत रही खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। महंगाई में इस तेज उछाल ने आम लोगों के घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
खुदरा महंगाई लगातार चौथे महीने 4% से ऊपर
भारतीय रिजर्व बैंक के लिए खुदरा महंगाई दर को 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना और इसे 4 प्रतिशत के स्तर पर लाना प्रमुख लक्ष्य है। हालांकि, सितंबर में महंगाई दर लगातार चौथे महीने 4 प्रतिशत के निर्धारित स्तर से ऊपर बनी रही। ऐसे में कीमतों पर नियंत्रण रखना केंद्रीय बैंक के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
इस बीच, रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह नीतिगत रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की अलग-अलग तिमाहियों के लिए महंगाई के अनुमान भी जारी किए हैं।
अनुमान के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। वहीं अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इसके 6 प्रतिशत, जनवरी-मार्च 2027 में 5.7 प्रतिशत और अप्रैल-जून 2027 में 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
खाद्य महंगाई में भी तेज बढ़ोतरी
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार (12 अक्टूबर) को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में खाद्य महंगाई दर भी बढ़ी है। अगस्त में 5.97 प्रतिशत रही खाद्य महंगाई सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित नई श्रृंखला में 2024 को आधार वर्ष माना गया है। इसके तहत सितंबर में महंगाई का आंकड़ा लगातार ऊंचे स्तर पर पहुंचा है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स, लंदन की लीड इकोनॉमिस्ट अलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद ने कहा कि ताजा आंकड़े ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की संभावना को मजबूत करते हैं। उनके मुताबिक, रिजर्व बैंक ने हाल में यह संकेत दिया है कि वह महंगाई और उससे जुड़े जोखिमों को देखते हुए अपनी नीति में बदलाव के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि भले ही कुल मांग का दबाव अभी सीमित है, लेकिन महंगाई के बढ़ते आंकड़े और कीमतों पर बढ़ते दबाव के संकेत चिंता बढ़ा रहे हैं। उनके अनुमान के मुताबिक, दिसंबर और फरवरी में 25-25 बेसिस प्वाइंट की दो और बढ़ोतरी की संभावना है।
ईंधन और आयातित कीमतों का बढ़ रहा असर
सिंगापुर के डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के मुताबिक, सामान्य से कम बारिश, आयातित वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और ईंधन से जुड़ी चीजों के महंगे होने से कई क्षेत्रों में खाद्य महंगाई तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि ईंधन की ऊंची कीमतों का असर गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार, कोर महंगाई के आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि कीमतों से जुड़ा जोखिम अब मामूली नहीं रह गया है। ऊंची महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक दिसंबर 2026 में एक और बार ब्याज दर बढ़ाने का विकल्प खुला रख सकता है।
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