बजट 2026 में क्या रह सकता है ख़ास
नई दिल्ली: फरवरी में पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 इस बार मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स के लिए खास रहने की उम्मीद जगा रहा है। महंगाई, बढ़ती EMI और रोज़मर्रा के खर्चों के दबाव के बीच सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह बजट में ऐसे फैसले ले, जिससे आम और मध्यम वर्गीय परिवारों को सीधी राहत मिल सके। बजट से पहले मिल रहे संकेतों और एक्सपर्ट्स की राय मानें तो टैक्स, सेविंग और खर्च—तीनों मोर्चों पर कुछ बड़े ऐलान संभव हैं।
सबसे ज्यादा निगाहें नौकरीपेशा और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार New Tax Regime में बदलाव कर सकती है। Standard deduction बढ़ाने, टैक्स स्लैब की सीमा ऊपर ले जाने और ₹7 से ₹10 लाख तक की आय वालों को राहत देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो लाखों सैलरीड लोगों की जेब में हर महीने कुछ अतिरिक्त पैसा बच सकता है, जो महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी।
Budget 2026 में सीनियर सिटीजन के लिए भी राहत की पूरी गुंजाइश है। फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग्स पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ सकती है, वहीं हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल खर्चों पर अतिरिक्त डिडक्शन का ऐलान हो सकता है। इसके साथ ही होम लोन लेने वालों के लिए भी अच्छी खबर आने की चर्चा है। Home loan interest पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने या first-time home buyers को अतिरिक्त लाभ देने पर सरकार विचार कर सकती है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।
छोटे व्यापारी, MSME और स्वरोजगार करने वाले लोग भी इस बजट से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। Presumptive tax scheme की सीमा बढ़ाने, टैक्स compliance को आसान बनाने और डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं स्टार्टअप्स, खासकर AI, green energy, EV और deep-tech से जुड़े नए उद्यमों को टैक्स इंसेंटिव या फंडिंग सपोर्ट मिलने की संभावना है, जिससे रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। महिलाओं के लिए भी savings, insurance और निवेश पर अतिरिक्त टैक्स लाभ देने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, ताकि महिला वर्कफोर्स को और मजबूत किया जा सके।
कुल मिलाकर, Budget 2026 का फोकस मिडिल क्लास फैमिली, नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स, सीनियर सिटीजन और छोटे कारोबारियों पर नजर आ रहा है। अगर ये संभावित राहतें हकीकत बनती हैं, तो इसे आम लोगों के लिए एक “जेब-फ्रेंडली बजट” कहा जा सकता है। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब साफ होगा कि सरकार वाकई मध्यम वर्ग और टैक्स देने वालों को कितनी बड़ी राहत देने जा रही है।
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