नई दिल्ली : यूनियन बजट 2026 पेश होते ही बुलियन मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के तुरंत बाद सोना और चांदी दोनों के दाम तेज़ी से लुढ़क गए। एमसीएक्स पर सोना 3 फीसदी से ज्यादा गिरकर करीब 1,47,297 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी करीब 9 फीसदी टूटकर 2,65,652 रुपये प्रति किलो के स्तर पर लोअर सर्किट में पहुंच गई। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार में रिकॉर्ड गिरावट देखी गई थी, जब सोना करीब 14 हजार रुपये और चांदी लगभग 20 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती हुई थी। बजट के बाद बिकवाली और तेज हुई, हालांकि जानकार मानते हैं कि इसकी जड़ें बजट से ज्यादा ग्लोबल संकेतों में हैं।
क्यों टूटा सोना-चांदी? ग्लोबल फैक्टर्स का असर
पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 150 फीसदी और चांदी 326 फीसदी तक उछल चुकी थी। ऐसे में बजट डे पर निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की। बड़े संस्थागत निवेशक अपनी लॉन्ग पोजिशन काटते नजर आए, क्योंकि बाजार पहले से ही ओवरबॉट जोन में था। इसी के साथ अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी दबाव बढ़ाया। डॉलर इंडेक्स 0.57 फीसदी चढ़कर 96.73 पर पहुंच गया, जिससे सोना-चांदी जैसी डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज पर असर पड़ा।
फेड की अनिश्चितता और बाजार में बढ़ी घबराहट
अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लेकर अनिश्चितता ने भी गिरावट को हवा दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वार्श को फेड चेयर के लिए नामित किए जाने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ीं और बॉन्ड यील्ड बढ़ गई। नतीजतन, स्पॉट गोल्ड करीब 8.9 फीसदी गिरकर 4,894 डॉलर प्रति औंस और सिल्वर 26 फीसदी टूटकर 85.20 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। बजट से पहले इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की उम्मीदें भी थीं, लेकिन कोई बदलाव न होने से सेंटीमेंट और बिगड़ गया।
ईटीएफ और फ्यूचर्स सेगमेंट में भी भारी बिकवाली दिखी और कई सिल्वर ईटीएफ 15 से 19 फीसदी तक टूट गए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट एक करेक्शन है। लंबी अवधि में सोना-चांदी की मांग बनी रह सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचते हुए बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।