पटना. बिहार में मुख्यमंत्री का फैसला 14 नवंबर को होगा. इस बीच महिला वोटर्स का रुझान इस बार काफी चौंकाने वाला नजर आ रहा है. पिछले 20 सालों से राज्य पर राज कर रहे नीतीश कुमार इस बार महिला मतदाताओं के समर्थन में कमजोर पड़ते दिख रहे हैं.
पहले चरण से लेकर दूसरे चरण तक महिला वोटर्स ने भारी संख्या में मतदान किया. ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम चरण में महिला मतदान 69.04 प्रतिशत और पुरुष मतदान 61.56 प्रतिशत रहा, यानी महिला मतदान में लगभग 7.5 प्रतिशत की बढ़त रही. पिछले तीन चुनावों में भी महिला मतदान पुरुषों से 3 से 7 प्रतिशत अधिक रहा है. इस बार भी महिला वोटिंग का यह अंतर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है.
बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 66.91 फीसदी मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 71.06 फीसदी रही, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 62.8 फीसदी रही. यानी पुरुषों की तुलना में 8.26 फीसदी ज्यादा महिलाओं ने अपने वोट का अधिकार इस्तेमाल किया.
जेडीयू का पारंपरिक वोट बैंक रही महिलाओं में इस बार उत्साह कम देखा जा रहा है. कई क्षेत्रों में महिला वोटर्स महागठबंधन के प्रत्याशियों के समर्थन में एकजुट नजर आए हैं. वहीं ओबीसी और ईबीसी महिला मतदाताओं की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. 2020 में ओबीसी/ईबीसी की 63% महिलाओं ने एनडीए को समर्थन दिया था, लेकिन इस बार उनकी पैठ में बदलाव की संभावना जताई जा रही है.बिहार में नए वोटर्स, खासकर युवा वर्ग, तेजस्वी यादव को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं मानी जा रही हैं, जो युवाओं को बदलाव की उम्मीद दिला रही हैं.
सीमांचल क्षेत्र में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को लेकर भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं दिख रहा है. सर्वे के अनुसार एक-दो सीटें जीतने का दावा है, लेकिन मुस्लिम समाज में उत्साह कम है.
वहीं नई पार्टी जन सुराज के जनक प्रशांत किशोर ने बिहार में अपनी पार्टी को लेकर कोई बड़ा दावा नहीं किया, हालांकि माना जा रहा है कि उन्होंने बीजेपी के वोटों को काटा है. यदि यह सही साबित होता है, तो महागठबंधन को बड़ा लाभ हो सकता है.
कई सर्वे में बिहार की जनता ने स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी यादव को देखना चाहते हैं. पीपल्स पल्स द्वारा किए गए एक एग्जिट पोल में सामने आया कि 32% लोग चाहते हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तेजस्वी यादव हों, जबकि 30% लोग नीतीश कुमार को पसंद करते हैं.इस सर्वे के मुताबिक, महज 8% लोग ही प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. इतने ही प्रतिशत वोटर चिराग पासवान को पसंद करते हैं. सीएम फेस के रूप में सम्राट चौधरी को 6% लोगों ने चुना है
इस चुनाव में महिला वोटर्स और नए युवा वोटर्स की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर युवा और महिला मतदाता तेजस्वी यादव की ओर आकर्षित होते दिख रहे हैं. ऐसे में बिहार का राजनीतिक नक्शा इस बार काफी बदल सकता है.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिला वोटर्स और नए युवा मतदाताओं की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है. पारंपरिक जेडीयू वोट बैंक में गिरावट और महागठबंधन की बढ़ती लोकप्रियता इस बार चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक है. बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और नौकरी जैसे मुद्दों के चलते युवा और महिला वोटर्स तेजस्वी यादव की ओर आकर्षित दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में 14 नवंबर को आने वाले परिणाम बिहार की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल सकते हैं.