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नारों की जंग में गरमाया बिहार चुनाव : ‘फिर से नीतीश’ बनाम ‘अबकी तेजस्वी सरकार’

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव बेहद करीब है और पहले चरण की 121 सीटों पर मतदान के लिए चुनाव प्रचार तेज़ी पकड़ चुका है. चुनावी मैदान में उतर चुके सभी प्रमुख दल एक-दूसरे पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे हैं. वादों, आरोपों और प्रत्युत्तर के बीच अब नारेबाज़ी चुनावी हवा को और भी गर्म बना रही है.

सोशल मीडिया से लेकर जनसभाओं तक, सियासी दल अपने-अपने नारों से जनता को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. इनमें कई नारे वायरल भी हो रहे हैं. सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नारा ‘25 से 30, फिर से नीतीश’ लोगों के बीच चर्चा में है. इसके जवाब में महागठबंधन ने ‘छह और 11, एनडीए नौ दो ग्यारह’ का नारा देकर पलटवार किया है.

बीजेपी ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल को मुद्दा बनाते हुए ‘विकास बनाम विनाश’ और ‘फिर एक बार सुशासन की सरकार, जंगलराज को दूर रखेगा बिहार’ जैसे नारे दिए हैं।.वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने नया नारा उछाला-‘25 से 30, हमारे दो भाई नरेंद्र और नीतीश’.

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने युवा नेतृत्व और बदलाव के मुद्दे पर फोकस किया है. पार्टी के प्रमुख नारे हैं-
‘बदलो सरकार, बदलो बिहार’, ‘बिहार बदलने वाला है, सरकार बदलने वाली है’, ‘अबकी बार तेजस्वी सरकार’, और ‘बिहार का भला होगा नौकरी रोजगार से, बिहार का भला होगा तेजस्वी सरकार से’.

कांग्रेस ने भी सत्ताधारी दल पर सीधा वार करते हुए ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’, ‘घर-घर अधिकार’ और ‘पलायन रोकें, नौकरी दें’ जैसे नारे अपनाए हैं.

वहीं, जनता दल (यू) ने नीतीश कुमार की छवि और विकास के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए ‘नीतीश हैं तो विश्वास है’, ‘विकास की बयार, जनता का प्यार, फिर आएगी नीतीश सरकार’ और ‘फिर दौड़ेगा विकास का पहिया, बोल रहा बिहार, फिर से नीतीश कुमार’ जैसे नारे दिए हैं.

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ नारे के जरिए अलग पहचान बनाने की कोशिश की है.वहीं प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने ‘आ रहा है जन सुराज, बिहार तैयार है- 14 नवंबर को जनता का राज’ नारे से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.

बिहार चुनाव में इस बार नारेबाज़ी सिर्फ प्रचार का औजार नहीं, बल्कि जनमानस को प्रभावित करने का हथियार बन गई है. हर दल अपने नारे में भावनात्मक जुड़ाव और विकास का दावा जोड़ने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, असली सवाल यही है कि जनता के दिल में कौन-सा नारा उतर पाएगा और वोटों में कौन-सा नारा तब्दील होगा-इसका फैसला 121 सीटों पर होने वाले पहले चरण के मतदान से तय होना शुरू होगा.

news desk

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