पटना: बिहार में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्मा गया है. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी महागठबंधन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. दोनों दल एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला NDA जनता को चेतावनी दे रहा है कि अगर राजद (RJD) के नेतृत्व वाला महागठबंधन सत्ता में लौटा, तो ‘जंगलराज’ की वापसी होगी. वहीं, विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा है कि नीतीश कुमार ने दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहते हुए भी बिहार के विकास में कोई ठोस परिवर्तन नहीं किया.
तेजस्वी यादव की चुनावी घोषणाएं
इसी बीच, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई बड़ी घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय दोगुना किया जाएगा. इसके अलावा, पंचायत और ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों को पेंशन और 50 लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाएगा.
तेजस्वी यादव ने जनता से केवल 20 महीने का समय मांगा. उन्होंने कहा, “मैंने 17 महीने में नीतीश सरकार के 17 साल के काम को पीछे छोड़ दिया. मेरे वादे खोखले नहीं, बल्कि ज़मीनी होंगे. जैसा पहले किया है, वैसा ही अब भी करके दिखाऊंगा.”
उन्होंने आगे कहा कि जन वितरण प्रणाली (PDS) के वितरकों का मानदेय और कमीशन बढ़ाया जाएगा तथा अनुकंपा योजना में 58 साल की आयु सीमा समाप्त की जाएगी. इसके अलावा, नाई, कुम्हार और लोहार समुदायों को पांच साल में पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया.
‘विकास बनाम जंगलराज’ बना मुख्य चुनावी मुद्दा
बिहार की सियासत में अब आरोप-प्रत्यारोप के बीच ‘विकास बनाम जंगलराज’ की बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है. राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव में यही मुद्दा निर्णायक साबित होगा, और इसी के इर्द-गिर्द राज्य की राजनीति की दिशा तय होगी.