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ईरान में हालात काबू में लाने के लिए बासिज की तैनाती, क्या है यह अर्द्धसैनिक बल?

ईरान में हालात तनावपूर्ण, बासिज अर्द्धसैनिक बल सड़कों पर उतारा गयाईरान की सड़कों पर मचे बवाल और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार ने बासिज नामक अर्द्धसैनिक संगठन को मैदान में उतार दिया है। इसके बाद देश के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

ईरान इस समय भारी तनाव के दौर से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक असंतोष को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और मौजूदा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कई शहरों में हालात बेकाबू होने की खबरें सामने आई हैं।

इस बीच ईरान की सरकार का आरोप है कि इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इजरायल का समर्थन मिल रहा है। तेहरान का मानना है कि विदेशी ताकतें देश में अस्थिरता फैलाकर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। ईरानी नेतृत्व का दावा है कि अमेरिका लगातार राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बनाकर तख्तापलट जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका और इजरायल को लेकर अपनी सैन्य रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से कोई भी सैन्य कार्रवाई की गई, तो उसका सीधा जवाब इजरायल को निशाना बनाकर दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि उसकी मिसाइल प्रणाली पूरी तरह तैयार है।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच युद्ध की आशंका भी तेज हो गई है। हालांकि अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश के भीतर जारी प्रदर्शनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों और हिंसा फैलाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हालात पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने बासिज अर्द्धसैनिक बल को तैनात किया है। यह बल आंतरिक सुरक्षा और प्रदर्शन नियंत्रण में अहम भूमिका निभाता है। सरकार का कहना है कि किसी भी कीमत पर देश की स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखी जाएगी।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार (9 जनवरी) को जुमे की नमाज़ के बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश के नाम संबोधन किया। अपने भाषण में उन्होंने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का एजेंडा बताया। खामेनेई ने साफ कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

इसके बाद ईरानी संसद की सिफारिश पर हालात को काबू में करने के लिए बासिज अर्द्धसैनिक समूह को सड़कों पर तैनात कर दिया गया।

बासिज क्या है और ईरान में इसकी भूमिका क्यों अहम मानी जाती है?

बासिज एक फारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है—लामबंदी। इस संगठन का गठन वर्ष 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद किया गया था। उस समय ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमैनी का मानना था कि यह बल देश को अमेरिका और विदेशी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

बासिज में मुख्य रूप से ग्रामीण और रूढ़िवादी इस्लामिक पृष्ठभूमि के लोगों को शामिल किया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह संगठन मस्जिदों के माध्यम से सक्रिय रहता है और सामाजिक व सुरक्षा गतिविधियों पर नजर रखता है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के अधीन काम करता है बासिज

बड़े स्तर पर बासिज संगठन का नियंत्रण ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथ में होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बासिज में करीब 2 करोड़ सदस्य हैं, जिनकी उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच बताई जाती है।

इस संगठन ने 2009 और 2022 में भी ईरान में हुए बड़े सरकार विरोधी आंदोलनों को दबाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब एक बार फिर देश में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को काबू में करने की जिम्मेदारी बासिज को सौंपी गई है।

अमेरिका के प्रतिबंध और मानवाधिकार आरोप

अमेरिका ने बासिज बल और उसके कई कमांडरों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। अमेरिका इस संगठन को एक कठोर और दमनकारी बल मानता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बासिज ईरान में असहमति की आवाजों को दबाने के लिए हिंसक कार्रवाई करने में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।

ईरान में बवाल और सरकार की कार्रवाई

ईरान में 27 दिसंबर 2025 से महंगाई और आर्थिक हालात को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। ये प्रदर्शन धीरे-धीरे सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों की कई मांगें जायज हैं, लेकिन कुछ उपद्रवी तत्वों ने आंदोलन को हिंसक बना दिया है।

मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को दबाने के दौरान अब तक 500 से अधिक नागरिकों की मौत होने का दावा किया गया है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

ईरान में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान में अत्याचार जारी रहे, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप पर भी विचार कर सकता है।

news desk

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