गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव की शुरुआत के साथ ही सियासत गरमा गई है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों के फॉर्म खारिज होने की खबर सामने आते ही पार्टी में हलचल मच गई। खासतौर पर जालूकबारी सीट पर सबकी नजर टिक गई, जहां मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ उतरीं बिदिशा नियोग का नाम भी शुरुआती सूची में शामिल था।
क्या है पूरा मामला?
चुनाव आयोग के मुताबिक, स्क्रूटनी के दौरान जालूकबारी से बिदिशा नियोग, ढकुआखाना से आनंद नाराह और हाफलोंग से निर्मल लंगथासा के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। कुल 18 उम्मीदवारों के फॉर्म रिजेक्ट हुए हैं। हालांकि, आयोग की तरफ से खारिज होने की विस्तृत वजहें सामने नहीं आईं, सिर्फ तकनीकी खामियों की बात कही गई है।
बिदिशा नियोग ने क्या कहा?
मामले में मोड़ तब आया जब बिदिशा नियोग खुद सामने आईं। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने दो सेट में नामांकन भरे थे—एक खारिज हुआ, लेकिन दूसरा वैध पाया गया है। इसका मतलब यह है कि वह अब भी जालूकबारी सीट से चुनावी मैदान में बनी हुई हैं। यानी शुरुआती खबरों से जो बड़ा झटका लग रहा था, वह पूरी तरह सही नहीं निकला।
कांग्रेस बनाम भाजपा—सियासी टकराव तेज
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश बताया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा के दबाव में विपक्षी उम्मीदवारों को निशाना बनाया जा रहा है, खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला कड़ा है। वहीं भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हो रही है और इसमें किसी तरह का पक्षपात नहीं है।
चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि स्क्रूटनी अभी पूरी नहीं हुई है और कुछ सीटों पर जांच जारी है। असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे आएंगे, जबकि नाम वापसी की आखिरी तारीख 26 मार्च तय की गई है।
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे कितना बढ़ता है और चुनावी नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।