अंटार्टिका डूम्सडे ग्लेशियर खतरा
अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर, जिसे आमतौर पर “डूम्सडे ग्लेशियर” कहा जाता है, एक बार फिर वैज्ञानिकों की चिंता का बड़ा कारण बन गया है। पश्चिमी अंटार्कटिका में स्थित यह विशाल ग्लेशियर अगर पूरी तरह पिघलता है, तो वैश्विक समुद्र स्तर करीब 65 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। इसका असर तटीय शहरों, छोटे द्वीपीय देशों और करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ेगा। हालिया शोध से पता चला है कि इसका पूर्वी आइस शेल्फ तेजी से कमजोर हो रहा है, जो आने वाले समय के लिए खतरे का संकेत है।
यह अध्ययन Journal of Geophysical Research: Earth Surface में प्रकाशित हुआ है और अमेरिका-ब्रिटेन की संयुक्त पहल इंटरनेशनल थ्वाइट्स ग्लेशियर कोलैबोरेशन (ITGC) का हिस्सा है। वैज्ञानिकों ने 2002 से 2022 तक के सैटेलाइट डेटा, GPS रिकॉर्ड और बर्फ की गति के आंकड़ों का विश्लेषण किया। खास ध्यान उस “पिनिंग पॉइंट” पर दिया गया, जो अब तक बर्फ को थामे हुए था। शोध से पता चला कि यही हिस्सा अब धीरे-धीरे अस्थिरता की वजह बन रहा है।
अध्ययन में सामने आया कि बर्फ टूटने की प्रक्रिया चार चरणों में हुई। पहले बड़े शियर फ्रैक्चर बने, फिर समय के साथ छोटी लेकिन ज्यादा संख्या में दरारें बनने लगीं। 2002 में कुल फ्रैक्चर लंबाई करीब 165 किलोमीटर थी, जो 2021 तक बढ़कर 335 किलोमीटर से ज्यादा हो गई। यह बदलाव बताता है कि ग्लेशियर अंदर से कमजोर होता जा रहा है और उसका संतुलन बिगड़ रहा है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस कमजोरी से हर साल 1.2 से 1.6 गीगाटन बर्फ समुद्र में जा सकती है, जिससे समुद्र स्तर में हर साल लगभग 0.2 से 0.3 मिलीमीटर की बढ़ोतरी होगी। यह प्रक्रिया एक बार तेज हुई तो इसे रोकना मुश्किल हो सकता है। थ्वाइट्स ग्लेशियर का यह हाल साफ संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन अब दूर की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट बन चुका है और समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली: 6 अगस्त 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।…
मेष राशिआज का दिन मिला-जुला रहने वाला है। कारोबार में लाभ मिलने के संकेत हैं।…
नई दिल्ली: रेडमी अगले सप्ताह चीन में अपनी नई Redmi K100 सीरीज लॉन्च करने जा…
इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने विदेशी मीडिया कर्मियों के लिए नए नियम लागू करते हुए उनकी…
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए केंद्र सरकार…
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में…