पटना। बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में है।
मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने राजनीतिक रिश्तों और पार्टी के लिए दी गई कुर्बानी का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया है।
उनका कहना है कि जब नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं थी, तब भी वह उनके साथ खड़े थे और उस दौरान उनके नौ लोग मारे गए थे। उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
अनंत सिंह ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पार्टी को अपना माना और मुश्किल समय में साथ दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्होंने नीतीश कुमार का साथ निभाने के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी दी, तो नीतीश कुमार ने पार्टी के लिए क्या किया?
अनंत सिंह ने यह भी कहा कि वह किसी को चुनौती नहीं दे रहे हैं और पार्टी को उनके बारे में जो फैसला करना है, वह करे। उनके बयान का केंद्र पुराने रिश्तों के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक मतभेद भी हैं।
विवाद की प्रमुख वजह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू द्वारा नीरज कुमार को दोबारा उम्मीदवार बनाया जाना है। अनंत सिंह इस फैसले से असहमत हैं और नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं। दूसरी ओर, उन्होंने जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने की बात कही है।
इस घटनाक्रम ने जेडीयू के सामने असहज स्थिति पैदा की है। पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार एक तरफ है, जबकि उसी दल के विधायक का समर्थन दूसरे प्रत्याशी को मिल रहा है। ऐसे में पटना स्नातक सीट का चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर एकजुटता की भी परीक्षा बन गया है।
अनंत सिंह के बयान के संदर्भ में अगस्त 2004 की उस मुठभेड़ का जिक्र भी सामने आया है, जिसमें उनके आठ सहयोगियों और एसटीएफ के एक जवान की मौत हुई थी। इस तरह कुल नौ लोगों की जान गई थी। इन मौतों को लेकर अनंत सिंह ने अपने पुराने राजनीतिक दौर और कुर्बानी का हवाला दिया है।
हालांकि, उनके बयान को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मुठभेड़ में हुई मौतों का तथ्य और उन घटनाओं को लेकर उनका राजनीतिक दावा अलग-अलग बातें हैं।
बिहार विधान परिषद की आठ स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान निर्धारित है। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार और जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह के बीच मुकाबले पर खास नजर है।
अनंत सिंह के विरोध के बीच यह देखना अहम होगा कि उनके समर्थन का चुनावी असर कितना पड़ता है और जेडीयू अपने उम्मीदवार के पक्ष में कितनी मजबूती से मतदाताओं को एकजुट कर पाती है। फिलहाल, चुनाव से पहले उनके बयान ने बिहार की सियासत में पुराने रिश्तों, वफादारी और पार्टी अनुशासन को लेकर बहस तेज कर दी है।
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