भारत की इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी को लेकर सरकार अब तक के सबसे आक्रामक मूड में है। ‘रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ लफ्जों में नेशनल सिक्योरिटी पर अपना विजन क्लियर कर दिया। शाह ने दोटूक कहा कि भारत की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा, न केवल नई घुसपैठ पर पूरी तरह ताला लगेगा, बल्कि देश में अवैध रूप से रह रहे हर एक घुसपैठिए को ‘चुन-चुनकर’ डिपोर्ट किया जाएगा।
आबादी बदलने की साजिश का ‘द एंड’
बॉर्डर इलाकों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव को सरकार ने गंभीर खतरा माना है। इससे निपटने के लिए गृह मंत्री ने एक नेक्स्ट-लेवल एक्शन प्लान पेश किया, केंद्र सरकार जल्द ही एक सुपर-एक्टिव ‘डेमोग्राफी मिशन’ लॉन्च करने जा रही है। यह मिशन उन क्रिटिकल और संवेदनशील इलाकों को ट्रैक और मार्क करेगा, जहाँ डेमोग्राफिक बैलेंस बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। इस मिशन से मिलने वाला रीयल-टाइम डेटा सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) से शेयर किया जाएगा ताकि तुरंत ऑन-ग्राउंड एक्शन हो सके।
अमित शाह का कड़ा संदेश:
“देश की डेमोग्राफी को बदलने के हर हिडन एजेंडे और सोची-समझी साजिश को हर कीमत पर कुचलना होगा।”
सरहदों पर ‘डिजिटल लॉक’
पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं की सुरक्षा को अपग्रेड करने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) एक हाई-टेक सिक्योरिटी शील्ड तैयार कर चुका है: फुलप्रूफ सिक्योरिटी के लिए इस ग्रिड का ब्लूप्रिंट पूरी तरह रेडी है। जल्द ही रोल-आउट होने वाले ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ के तहत अत्याधुनिक तकनीक का ऐसा पहरा होगा कि दोनों देशों की सीमाएं ‘इम्पैनिट्रेबल’ (लोहे की दीवार) बन जाएंगी। बिना इजाजत परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा।