Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल
Reading: 200 सालों से ग्रीनलैंड पर अमेरिका की नजर, यूरोप से टकराव का खतरा!
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > 200 सालों से ग्रीनलैंड पर अमेरिका की नजर, यूरोप से टकराव का खतरा!
Trending Newsवर्ल्ड

200 सालों से ग्रीनलैंड पर अमेरिका की नजर, यूरोप से टकराव का खतरा!

news desk
Last updated: January 21, 2026 12:02 pm
news desk
Share
SHARE

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आर्कटिक क्षेत्र के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का पूरा मन बना चुके हैं और सोशल मीडिया पर हर दिन अपने इरादे जाहिर कर रहे हैं। इसके अलावा, ट्रंप ईरान को भी निशाना बनाना चाहते हैं और इसके लिए उनका फुल प्रूफ प्लान तैयार है। कहा जा रहा है कि एक से तीन दिन के अंदर ईरान को टारगेट किया जा सकता है, लेकिन ग्रीनलैंड पर उनका ध्यान स्थिर है।

इतना ही नहीं, अगर यूरोप के देशों से टकराव करना पड़े तो इसके लिए भी ट्रंप पूरी तरह तैयार हैं। ग्रीनलैंड को लेकर इतिहास में देखें तो अमेरिका पिछले 200 सालों से इस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।

नॉर्वे और डेनमार्क के बीच 434 साल पुरानी संधि टूटने के बाद अमेरिका की निगाह ग्रीनलैंड पर गई। 1814 की कील संधि के तहत नॉर्वे डेनमार्क से अलग हो गया, लेकिन ग्रीनलैंड उनके पास रह गया। अब ट्रंप ने साफ कहा है कि वे इसे अमेरिका में शामिल करना चाहते हैं। इस कदम से यूरोप में हलचल बढ़ सकती है। कहा जा रहा है कि अगर यूरोपीय देश अमेरिका को रोकते हैं, तो दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की आशंका पैदा हो सकती है।

2019 में ट्रंप ने पहली बार ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छा जताई थी। वेनेजुएला के बाद दूसरे कार्यकाल में उन्होंने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयू जैक्सन ने 1832 में इसे खरीदने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिका लगातार अपने क्षेत्र का विस्तार करना चाहता रहा है और लुइसियाना परचेज और मुनरो डॉक्ट्रिन के तहत दूसरे देशों के इलाकों और द्वीपों पर कब्जे की होड़ में शामिल रहा।

अलास्का और ग्रीनलैंड पर अमेरिका की रणनीति

अलास्का का अधिग्रहण

अमेरिकी विदेश मंत्री विलियम सेवर्ड ने 1867 में अलास्का खरीदने की घोषणा की। अलास्का पर कब्ज़ा करने का उद्देश्य कनाडा पर दबाव डालकर उसे अमेरिका में शामिल करना था। हालांकि, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देश इसका विरोध कर रहे थे।

प्रथम विश्व युद्ध से पहले प्रयास

अमेरिका ने ग्रीनलैंड और डेनिश वेस्ट इंडीज को खरीदने की कोशिश की ताकि सामरिक समुद्री क्षेत्रों पर नियंत्रण पाया जा सके और उन्हें जर्मनी के खिलाफ सैन्य अड्डों के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। 31 मार्च 1917 को डेनिश वेस्ट इंडीज अमेरिका को सौंपा गया, लेकिन ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के कब्जे को मान्यता देने से अमेरिका ने इनकार कर दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध में प्रयास

द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की योजना बनाई। अप्रैल 1940 में नाजियों ने डेनमार्क पर कब्ज़ा किया, लेकिन ग्रीनलैंड पर नहीं। अमेरिका ने नुउक में वाणिज्यिक दूतावास खोलकर अपने इरादे जाहिर किए। डेनमार्क ने 1941 में नाजी खतरे के डर से अमेरिका को वहां सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति दे दी।

हिटलर की हार के बाद 1946 में अमेरिका ने ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा, लेकिन डेनमार्क ने इसे अस्वीकार कर दिया। उस समय डेनमार्क के लिए नाजी का खतरा तो नहीं था, लेकिन सोवियत संघ के कब्जे का डर उसे सताता रहा।

शीत युद्ध और बाद का दौर

शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव बढ़ा। अमेरिका ने ग्रीनलैंड को रणनीतिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना और 1951 में पिटुफिक स्पेस बेस स्थापित किया। यह基地 नाटो के उत्तरी ढाल का हिस्सा था। 1957 में डेनमार्क ने इसे परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र घोषित किया, लेकिन अमेरिकी परमाणु हथियार वहां रखे गए।

सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिका थोड़े समय के लिए शांत हुआ, लेकिन रूस के यूक्रेन पर हमले और चीन की समुद्री विस्तारवादी नीतियों ने अमेरिका को फिर से ग्रीनलैंड पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर किया। ट्रंप का कहना है कि चीन और रूस इस आर्कटिक इलाके पर नजर रखते हैं।

ट्रंप का नया अभियान

ट्रंप की पहली सरकार में 2019 में विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने आर्कटिक काउंसिल में ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिका ने चेतावनी दी कि आर्कटिक में केवल पर्यावरण और विज्ञान के नाम पर ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से भी ध्यान देना जरूरी है।

अब ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की योजना फिर से शुरू कर दी है। उन्होंने वहां के हर नागरिक को 1 मिलियन डॉलर देने का प्रस्ताव रखा और सैन्य तैनाती बढ़ा दी।

अमेरिका का मानना है कि अगर ग्रीनलैंड पर उसका नियंत्रण नहीं रहा, तो रूस और चीन जैसे देश इस क्षेत्र में अपने कदम बढ़ा सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप इसे रोकने के लिए किसी भी स्थिति में ग्रीनलैंड को अमेरिकी कब्जे में लाना चाहते हैं।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: 200 साल का विवाद, अंतरराष्ट्रीय तनाव, अमेरिका, अमेरिकी विदेश नीति, आर्कटिक, क्षेत्रीय टकराव, ग्रीनलैंड, ग्रीनलैंड विवाद, भू-राजनीति, यूरोप, रणनीति
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article “हां, मैं शंकराचार्य हूं…” मेला प्रशासन को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आठ पन्नों का जवाब, 24 घंटे का अल्टीमेटम
Next Article टी-20 विश्व कप को लेकर बांग्लादेश के रवैये के पीछे क्या पीसीबी का हाथ है?

फीचर

View More
लखनऊ चिकनकारी कारीगरों का संकट, जंग से ठप पड़ा काम

जंग ने छीनी लखनऊ चिकनकारी की चमक, सूने करघे, बुझते चूल्हे और उम्मीद की आखिरी डोर !

लखनऊ। नवाबों के शहर की पहचान सिर्फ उसकी तहज़ीब, अदब और इमामबाड़ों से नहीं है, बल्कि उन नाज़ुक धागों से…

By news desk 5 Min Read

इनर मंगोलिया की झीलों में छिपा था 10 करोड़ साल पुराना रहस्य, डायनासोर युग का यह छोटा जीव आखिर कैसे बचा रहा करोड़ों साल?

बीजिंग/नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026: चीन के इनर मंगोलिया से वैज्ञानिकों को…

3 Min Read

Good Friday 2026: ईसा मसीह की शहादत के दिन में ‘Good’ शब्द का रहस्य, शोक के दिन को क्यों कहा जाता है ‘पवित्र शुक्रवार’?

नई दिल्ली: आज 3 अप्रैल 2026 को दुनिया भर में गुड फ्राइडे…

3 Min Read

विचार

View More
भारत–पाकिस्तान क्रिकेट राइवलरी

रिंकू का ओवर और राइवलरी का बदलता अर्थ: क्या भारत–पाक मुकाबले से गायब हो गई वो अनिश्चितता?

रिंकू का ओवर और राइवलरी का बदलता अर्थ : भारत–पाकिस्तान…

February 16, 2026

भाग-3 : सत्याग्रह का दार्शनिक आधार: टॉल्स्टॉय, गीता और जैन अहिंसा

वैश्विक गांधी: Mandela, King, Einstein ...गांधी…

February 5, 2026

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष : दक्षिण अफ़्रीका-अपमान, प्रतिरोध और सत्याग्रह का जन्म

1893 में जब महात्मा गांधी दक्षिण…

January 30, 2026

भाग–1 : दक्षिण अफ़्रीका से आधुनिक भारत तक… गांधी, नैतिक राजनीति और आज की प्रासंगिकता

गांधी — इतिहास नहीं, एक नैतिक…

January 28, 2026

मनोरंजन से वैचारिक हथियार तक… भारतीय सिनेमा में प्रोपेगेंडा का बदलता चेहरा

लोकतंत्र में सिनेमा कभी केवल मनोरंजन…

January 9, 2026

You Might Also Like

Gmail का नया सिक्योरिटी फीचर बना गेमचेंजर
Trending Newsअन्य

Gmail का नया सिक्योरिटी फीचर बना गेमचेंजर! Email भेजते ही हो जाएगा Secret Code में लॉक

डिजिटल दुनिया में प्राइवेसी को लेकर गूगल ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। दुनिया के सबसे यूज़ड…

3 Min Read
थिएटर में फ्लॉप, OTT पर हिट बनी O’ Romeo
EntertainmentTrending News

सिनेमाघरों में नहीं चला जादू, अब घर बैठे दर्शकों को पसंद आ रही है ‘O’ Romeo’, Prime Video पर दूसरे नंबर तक पहुंची फिल्म

आज के दौर में फिल्मों का सफर सिर्फ थिएटर तक सीमित नहीं रह गया है। कई बार जो फिल्में बॉक्स…

3 Min Read
US Iran Peace Talks Islamabad 2026
Trending Newsवर्ल्ड

US-Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में शुरू हुई हाई-लेवल वार्ता में न्यूक्लियर और सैंक्शंस पर अब भी बड़ा गतिरोध

इस्लामाबाद, 11 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने की कोशिश…

5 Min Read
ईरान के नए सुप्रीम लीडर संभाल रहे अहम फैसले: रिपोर्ट
Trending Newsवर्ल्ड

हमले में घायल, फिर भी फैसले जारी ! Mojtaba Khamenei को लेकर अंदरखाने की बड़ी रिपोर्ट

ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह…

3 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • अन्य
  • Entertainment
  • बाजार
  • लाइफस्टाइल

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?