सियासी

अलविदा अजित पवार ! सत्ता, विद्रोह और वापसी की पूरी कहानी…

बरामती। 28 जनवरी की सुबह भारतीय राजनीति के लिए बेहद दुखद मानी जा रही है। बारामती में हुए विमान हादसे को लेकर अजित पवार समेत 5 यात्रियों के निधन की सूचना सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन की खबरों से राजनीतिक हलकों में शोक और सन्नाटा देखा जा रहा है। देशभर से नेता और समर्थक इस हादसे पर गहरा दुख जता रहे हैं।

अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के एक प्रमुख और प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं। हादसे की खबर मिलते ही उनके परिवार के सदस्य दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो गए हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का नाम हमेशा बड़े राजनीतिक उलटफेरों से जुड़ा रहा है। कभी अचानक सत्ता में एंट्री, कभी पार्टी लाइन से बगावत और फिर बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर दोबारा सत्ता में वापसी अजित पवार का राजनीतिक सफर कई मोड़ों से होकर गुज़रा है।

जब एक दिन के लिए डिप्टी सीएम बने अजित पवार…

साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद अजित पवार ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया। उन्होंने एनसीपी से अलग होकर बीजेपी को समर्थन दिया। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।
हालांकि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चल सकी। बहुमत साबित न होने के कारण महज तीन दिन में सरकार गिर गई, और अजित पवार को इस्तीफा देना पड़ा।

एनसीपी में वापसी, लेकिन असंतोष बरकरार

सरकार गिरने के बाद अजित पवार दोबारा शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में लौट आए। इसके बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महाविकास अघाड़ी सरकार बनी, जिसमें अजित पवार को फिर से डिप्टी सीएम बनाया गया।
हालांकि इस दौरान पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद लगातार सामने आते रहे।

पार्टी में टूट और खुली बगावत

साल 2023 में अजित पवार ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया। उन्होंने एनसीपी के कई विधायकों के साथ शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार को समर्थन दे दिया। इसके साथ ही एनसीपी दो गुटों में बंट गई—एक शरद पवार के नेतृत्व में और दूसरा अजित पवार के नेतृत्व में।

बीजेपी के साथ सत्ता में वापसी

बगावत के बाद अजित पवार ने बीजेपी के समर्थन से एक बार फिर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। इसके साथ ही वह दोबारा सत्ता के केंद्र में आ गए। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ एनसीपी की राजनीति को बदला, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता के समीकरणों को भी पूरी तरह से नया रूप दे दिया।

समर्थक और विरोधी क्या कहते हैं

अजित पवार के समर्थक उन्हें मजबूत प्रशासक और निर्णायक नेता मानते हैं, जबकि विरोधी उन्हें अवसरवादी राजनीति का प्रतीक बताते हैं।

news desk

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