नई दिल्ली: भारतीय आईटी सेक्टर इन दिनों भारी दबाव में दिखाई दे रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, और इसी डर के कारण टेक शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में Nifty IT इंडेक्स करीब 19% गिर चुका है और सेक्टर की मार्केट वैल्यू से लगभग 5.7 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए हैं। बड़े शेयरों की बात करें तो Tata Consultancy Services(TCS) लगभग 19% टूटकर अपने पीक से 44% नीचे पहुंच गया है। इसी तरह Infosys 21%, HCLTech 17%, जबकि Wipro और Tech Mahindra करीब 13% तक गिर चुके हैं।
इस गिरावट को ट्रिगर करने वाले कारणों में नए एजेंटिक AI टूल्स का लॉन्च भी माना जा रहा है, खासकर AI स्टार्टअप Anthropic के नए टूल्स के बाद ग्लोबल टेक सेक्टर में भी बिकवाली तेज हुई। निवेशकों को डर है कि AI आने वाले समय में कोडिंग, डेवलपमेंट और सर्विसेज जैसे कई पारंपरिक आईटी जॉब रोल्स की मांग कम कर सकता है।
क्या सच में इतना बड़ा खतरा है?
हालांकि सभी विशेषज्ञ इस गिरावट को स्थायी संकट नहीं मान रहे। निवेश बैंक JPMorgan Chase की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, AI से जुड़ा डर कुछ हद तक बढ़ा-चढ़ाकर देखा जा रहा है। रिपोर्ट का कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियां टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की “बैकबोन” हैं और एंटरप्राइज सिस्टम्स के इंटीग्रेशन, मैनेजमेंट और कस्टमाइजेशन में उनकी भूमिका अभी भी बेहद अहम रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आईटी सेक्टर के लिए खतरे के साथ-साथ बड़ा अवसर भी लेकर आएगा। लेगेसी सिस्टम मॉडर्नाइजेशन, AI एजेंट डेवलपमेंट, SaaS एप्लिकेशन री-राइटिंग और AI ट्रस्ट-सिक्योरिटी जैसे नए काम आने वाले समय में बड़ी डिमांड पैदा कर सकते हैं। इसलिए कई विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गिरावट ओवररिएक्शन हो सकती है और लंबी अवधि में सेक्टर फिर से मजबूत रिकवरी दिखा सकता है।