करवा चौथ का व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और कल्याण की कामना के लिए रखा जाता है.
चंद्र देव को समर्पित पूजा (चन्द्र पूजन) करवा चौथ व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
भगवान राम ने कहा कि चांद के अंधेरे भाग में विष है, जो विवाहितों पर बुरा असर डाल सकता है, इसलिए उसकी पूजा की जाती है.
एक बार रानी वीरवती ने भाईयों की चाल में आकर झूठा चांद देखकर व्रत तोड़ा, जिससे पति की मृत्यु हो गई. अगले वर्ष श्रद्धा से व्रत रखने पर यमराज ने पति को जीवनदान दिया.
चांद को शांति, सौहार्द और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
छन्नी से देखने का रीतिगत महत्व है, यह प्रतीक है कि चांद की रोशनी “शुद्ध” हो और व्यक्ति की नज़र से पहले पवित्र हो जाए.