13–14 जुलाई को अमावस्या पर सोमवती और भौमवती का दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है।
अमावस्या पर सूर्य-चंद्र एक ही राशि में होते हैं, जिससे साधना और पितृ कर्म का महत्व बढ़ जाता है।
जिनकी कुंडली में पितृ दोष, चंद्र दोष या मानसिक अशांति हो, उनके लिए तर्पण, दान और शिव पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है।
इस समय पितृ तर्पण, शिव अभिषेक, पीपल पूजा, तिल दान और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।
कर्क राशि वालों को इस दिन भावनाओं में आकर बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।
वृश्चिक राशि वालों को क्रोध और जल्दबाजी से बचकर धैर्य रखना शुभ रहेगा।
मीन राशि वालों के लिए पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक कार्य विशेष शुभ माने जाते हैं।
अमावस्या के दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज, क्रोध, और किसी का अपमान न करे, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
शाम को पीपल के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें। मान्यता है कि इससे पितृ कृपा प्राप्त होती है
आषाढ़ अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण, से इस शुभ संयोग का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय दृष्टिकोण पर आधारित है, IndianPressHouse इसकी पुष्टि नही करता है