भारत में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी बन चुका है। पर्यावरण थिंक टैंक ‘काउंसिल फॉर एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ (CEEW) की ताजा रिपोर्ट ने भविष्य की जो तस्वीर पेश की है, वह बेहद चिंताजनक है। एआई-संचालित प्लेटफॉर्म CRAVIS के डेटा विश्लेषण के अनुसार, आने वाले दो दशकों में भारतीयों को साल में 15 से 40 अतिरिक्त ऐसे दिनों का सामना करना होगा, जब पारा सामान्य से काफी ऊपर रहेगा।
सिर्फ तपते दिन नहीं, अब रातें भी छीनेंगी सुकून
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब केवल दिन की गर्मी से बचना काफी नहीं होगा।
- गर्म रातों का कहर: देश के कई हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म रातों की संख्या सालाना 20 से 40 दिन तक बढ़ सकती है।
- हीट स्ट्रेस का खतरा: लगातार गर्म रहने वाली रातें मानव शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं देतीं, जिससे ‘हीट स्ट्रेस’ और अन्य गंभीर स्वास्थ्य बीमारियां बढ़ने की चेतावनी दी गई है।
डेटा सेंटर्स पर बढ़ेगा ‘कूलिंग’ का बोझ
बढ़ती गर्मी का असर केवल सेहत पर ही नहीं, बल्कि देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भी पड़ेगा।
- ऑपरेटिंग खर्च में इजाफा: भारत के 281 डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए अब कहीं अधिक ऊर्जा और कूलिंग की आवश्यकता होगी, जिससे उनके संचालन का खर्च बढ़ जाएगा।
इन 5 राज्यों में ‘दोहरी मार’ की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण और मध्य भारत के कुछ राज्यों में कुदरत का दोहरा प्रहार देखने को मिल सकता है।
- गर्मी और बारिश का संगम: महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में गर्मी के साथ-साथ भारी बारिश के दिनों में भी 10 से 30 दिनों की बढ़ोतरी हो सकती है।
- बुनियादी ढांचे पर दबाव: इस दोहरे बदलाव से स्वास्थ्य जोखिमों के अलावा कार्यक्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव पड़ने की संभावना है।
कैसे तैयार हुई यह रिपोर्ट?
यह भविष्यवाणियां CRAVIS सिस्टम द्वारा की गई हैं, जो IMD और IITM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के पिछले 40 वर्षों के डेटा का विश्लेषण करता है। यह प्लेटफॉर्म 2070 तक के जलवायु अनुमान तैयार करने में सक्षम है, जिससे स्पष्ट है कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर इसका विनाशकारी असर पड़ सकता है।