भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार (15 अप्रैल) को छुट्टी के बाद शानदार वापसी की है। जैसे ही बाजार खुला, दलाल स्ट्रीट पर मानों खुशियों की लहर दौड़ गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों ने लंबी छलांग लगाई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में महज कुछ ही मिनटों में 9 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया।
इस महा-रैली के पीछे सबसे बड़ा हाथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का माना जा रहा है, जिनके युद्ध विराम की दिशा में आए सकारात्मक बयान ने ग्लोबल मार्केट का मूड बदल दिया।
आखिर क्यों ‘फायर’ हुआ शेयर बाजार? 5 मुख्य कारण, बाजार में आई इस हरियाली के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं
ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता
बाजार के लिए सबसे बड़ी ‘संजीवनी’ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। पाकिस्तान में अगले दो दिनों के भीतर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना है। इस खबर ने भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव को कम कर दिया।
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी
भारत के लिए राहत की बात यह रही कि ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। मौजूदा भाव 94 डॉलर के आसपास है। तेल सस्ता होने से भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपया, दोनों को मजबूती मिलती है।
वैश्विक बाजारों में ‘बुल्स’ का कब्जा
- भारतीय बाजार अकेला नहीं था जो भाग रहा था। एशियाई बाजारों में भी जोरदार खरीदारी दिखी:
- Nikkei (जापान): 1% की बढ़त
- Kospi (कोरिया): 3% का उछाल
- Nasdaq (अमेरिका): कल 2% चढ़कर बंद हुआ
मजबूत होता रुपया
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 93.23 के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की गिरती कीमतों और युद्ध की आशंका कम होने से भारतीय मुद्रा को सपोर्ट मिला, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा भी बढ़ा।
टेक्निकल रिकवरी (Short Covering)
लगातार गिरावट के बाद बाजार तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड (Oversold) जोन में था। एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस था। इसे पार करते ही बाजार में शॉर्ट-कवरिंग आई, जो इसे 24,500 के स्तर तक ले जा सकती है।
मार्केट एक्सपर्ट की राय
कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान का मानना है कि यदि निफ्टी 24,300 के ऊपर टिकने में कामयाब होता है, तो यह तेजी और आक्रामक हो सकती है। छोटे निवेशकों के लिए यह पोर्टफोलियो की रिकवरी का एक बड़ा मौका है।