नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की राजनीतिक दिशा बदलने वाला एक बड़ा कदम उठाते हुए संसद के बजट सत्र को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय, 16 से 18 अप्रैल तक के लिए विशेष बैठक बुलाई है। इस तीन दिवसीय सत्र का मुख्य एजेंडा नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) 2023 में क्रांतिकारी संशोधन करना है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि सरकार 16 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करेगी, जिसका लक्ष्य महिला आरक्षण को 2029 तक धरातल पर उतारना है।
2011 की जनगणना बनेगी आधार: खत्म होगा परिसीमन का इंतजार?
इस संशोधन का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘परिसीमन’ (Delimitation) की शर्तों में बदलाव है। सूत्रों के अनुसार:
- नया आधार: अब नई जनगणना के इंतजार के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को परिसीमन का आधार बनाया जा सकता है।
- सीटों में भारी उछाल: लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में 50% तक की वृद्धि का प्रस्ताव है।
- नया समीकरण: यदि यह लागू होता है, तो लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी। इसमें से 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
विपक्ष हमलावर: “चुनावी फायदे के लिए आनन-फानन में फैसला”
सरकार के इस कदम पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला और अखिलेश प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों और बंगाल चुनाव को देखते हुए महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार यह “चुनावी पैंतरा” चल रही है।
वहीं, समाजवादी पार्टी और राजद (RJD) ने अपनी पुरानी मांग को फिर दोहराया है। राजद सांसद संजय यादव ने कहा कि जब तक अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय नहीं होता, तब तक यह कानून अधूरा है।
संविधान संशोधन की चुनौती: दो-तिहाई बहुमत की दरकार
चूंकि यह एक संविधान संशोधन विधेयक है, इसे पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है। हालांकि कोई भी दल खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता, लेकिन ओबीसी कोटा और जनगणना के आधार पर सदन में तीखी बहस होना तय है।