पूरी दुनिया अभी पिछली पेंडेमिक के जख्मों से रिकवर हो ही रही थी कि एक ‘स्मार्ट फंगस’ ने मेडिकल साइंस के सामने नया चैलेंज पेश कर दिया है। जिसका नाम है कैंडिडा ऑरिस (C. Auris)। ये कोई आम फंगस नहीं, बल्कि एक ऐसा ‘सुपरबग’ है जिसने अमेरिका से लेकर भारत तक के डॉक्टर्स को हाई-अलर्ट पर डाल दिया है।
कौन है ये ‘विलेन’?
कैंडिडा ऑरिस असल में एक तरह का ‘यीस्ट’ है, लेकिन इसकी फितरत इसे ‘सुपरबग’ बनाती है। इसे दवाओं को चकमा देने में महारत हासिल है। मार्केट में मौजूद ज़्यादातर एंटी-फंगल दवाइयां इसके सामने सरेंडर कर चुकी हैं।
ये कोई साधारण इंफेक्शन नहीं, बल्कि एक ‘साइलेंट किलर’ है:
ये फंगस अस्पताल की दीवारों, बेड और मशीनों पर महीनों तक सर्वाइव कर सकता है। ये हेल्दी लोगों को कम, लेकिन ICU में भर्ती मरीजों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को अपना शिकार बनाता है। और इसके सिम्पटम्स इतने कॉमन हैं कि बिना हाई-टेक लैब टेस्टिंग के इसे पहचानना मुश्किल है।
‘आयरन’ का अनोखा खेल
हालिया रिसर्च ने सबको चौंका दिया है! ये फंगस इंसान के शरीर में घुसते ही ‘आयरन’ की चोरी करने लगता है। इसी आयरन से इसे पावर मिलती है। साइंटिस्ट अब ऐसी ‘स्मार्ट ड्रग्स’ तैयार कर रहे हैं जो इस फंगस की आयरन सप्लाई लाइन को काट देंगी, जिससे ये फंगस भूख से दम तोड़ देगा।
ग्लोबल इम्पैक्ट
अगर हम इसके ग्लोबल इम्पैक्ट पर नज़र डालें, तो सिचुएशन काफी क्रिटिकल है; अकेले USA के 27 से ज़्यादा राज्यों में अब तक 7,000 से भी अधिक सीरियस केस सामने आ चुके हैं, जबकि पूरी दुनिया के 60 से अधिक देशों में ये फंगस पहले ही अपना जाल फैला चुका है। इसी खतरे को देखते हुए CDC सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने अपनी वार्निंग में इसे ‘अर्जेंट थ्रेट’ की कैटेगरी में रखा है, जो ये साफ करता है कि इस ‘सुपरबग’ को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
खुद को कैसे रखें सेफ?
पैनिक होने की ज़रूरत नहीं है, बस स्मार्ट बनने की ज़रूरत है। अगर आप हॉस्पिटल जा रहे हैं, तो ये प्रोटोकॉल फॉलो करें:
- हाइजीन है वेपन : हाथों को बार-बार धोना या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना मैंडेटरी है।
- हॉस्पिटल स्टाफ से पूछें कि क्या वहां ‘इंफेक्शन कंट्रोल’ के कड़े नियमों का पालन हो रहा है कि नही?
- यदि अस्पताल से आने के बाद अचानक बुखार आए, तो तुरंत स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करें।