आजकल हर हाथ में मोबाइल और इंटरनेट होना आम बात है। ज़रूरत से ज़्यादा स्क्रीन टाइम सिर्फ बड़ों में ही नहीं, बच्चों में भी तेज़ी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर बच्चे किससे बात कर रहे हैं, किन वीडियो या ट्रेंड्स के संपर्क में आ रहे हैं, और कौन-से खतरनाक “गेम” का हिस्सा बन रहे हैं—इसकी जानकारी लेने की जहमत ज़्यादातर पैरेंट्स नहीं उठाते। लेकिन यही अनदेखी कभी-कभी बच्चे को हमेशा के लिए आपसे दूर कर देती है।
ऐसी ही एक दर्दनाक घटना इंग्लैंड के लीसेस्टरशायर में रहने वाले एक परिवार के साथ हुई। 6 मार्च की शाम जब 13 साल की बच्ची के कमरे का दरवाज़ा खोला गया, तो परिवार को ऐसा दृश्य दिखा जिसे कोई भी माता-पिता देखने की कल्पना भी नहीं कर सकता। वह बेसुध पड़ी थी। घबराए परिजनों ने इमरजेंसी सर्विस को बुलाया, डॉक्टरों ने हर संभव कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। मौके पर ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। कुछ ही पलों में पूरा परिवार उजड़ गया।
“क्रोमिंग” बनी मौत की वजह !
परिजनों के मुताबिक, मौत का कारण था सोशल मीडिया का खतरनाक ट्रेंड “क्रोमिंग” जिसमें बच्चे डियोड्रेंट और घरेलू स्प्रे की जहरीली गैसों को नशे की तरह सूंघते हैं। यह कुछ सेकंड का “फील” दिल की धड़कन रोक सकता है, दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है और कई बार तुरंत मौत तक ले जाता है।
सौतेले पिता रॉब बताते हैं, “पता नहीं वो पहले भी ऐसा करती थी या नहीं… लेकिन जिस दिन हादसा हुआ, उसने पूरा डियोड्रेंट कैन इस्तेमाल किया था। हमारी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई।”
पिता नम आंखों से कहते हैं, “वो हंसमुख, प्यारी और ऊर्जा से भरी हुई थी… अब सिर्फ उसकी यादें ही हैं।”
इस घटना के बाद बच्ची की बहन अलीशा ने एक ऑनलाइन पेटिशन शुरू की है, जिसमें मांग है कि स्कूलों में सोशल मीडिया ट्रेंड्स के खतरों पर अनिवार्य शिक्षा दी जाए और डियोड्रेंट व सॉल्वेंट प्रोडक्ट्स पर बड़े चेतावनी लेबल लगाए जाएं।
यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं—ये चेतावनी है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया गतिविधियां और ऑनलाइन ट्रेंड्स को नज़रअंदाज़ करना अब जोखिम नहीं, सीधा खतरा बन चुका है।