नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइंस में हाल ही में आए परिचालन संकट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और उद्योगपति गौतम अदानी पर बड़े आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि अदानी समूह द्वारा एक पायलट ट्रेनिंग कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के तुरंत बाद ही इंडिगो में भारी अव्यवस्था पैदा हुई, जो कथित तौर पर अदानी को फायदा पहुंचाने की साजिश हो सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 5 दिसंबर को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 550 से ज्यादा उड़ानों का रद्द होना, पायलटों की कमी और हजारों यात्रियों की परेशानी किसी सामान्य तकनीकी समस्या का नतीजा नहीं, बल्कि सरकार के “मोनोपॉली मॉडल” की देन है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अराजकता से इंडस्ट्री में अदानी को एयर इंडिया या अन्य क्षेत्रों में ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का रास्ता मिला।
अदानी अधिग्रहण और पुराने कोयला विवाद का भी हवाला
कांग्रेस ने हालिया अधिग्रहण की टाइमलाइन को उठाते हुए कहा कि 27 नवंबर 2025 को अदानी डिफेंस सिस्टम्स और होराइजन एयरो सॉल्यूशंस ने मिलकर एफएसटीसी में 73% हिस्सेदारी 820 करोड़ रुपये में खरीदी। पार्टी का आरोप है कि इसके ठीक बाद इंडिगो में पायलट संकट और गहरा गया। विपक्ष ने 2021 के कोयला संकट का भी जिक्र किया, जब देश में सिर्फ 2–3 दिन का स्टॉक बचने की खबरें आई थीं। कांग्रेस का दावा है कि यह अफवाह अदानी के खराब कोयले को ऊंचे दामों पर बेचने के लिए फैलाया गया था। ओसीसीआरपी की 2024 रिपोर्ट में भी कोयले के ओवरवैल्यूएशन के आरोप सामने आए थे।
फिलहाल, न तो अदानी समूह और न ही सरकार ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विमानन मंत्रालय ने इंडिगो संकट की जांच जरूर शुरू की है, लेकिन किसी षड्यंत्र की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि आरोप राजनीति को जरूर गर्म करेंगे, लेकिन पुख्ता सबूतों की कमी बड़ा सवाल बना रहेगा।