कर्नाटक में क्या होने वाला है… कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में क्या करने वाली है… क्या कांग्रेस कर्नाटक में सीएम बदलने की तैयारी में है… डी.के. शिवकुमार क्या बनने वाले अगले सीएम हैं… ये कुछ सवाल हैं जो कर्नाटक को लेकर पूछे जा रहे हैं.
इसका जवाब शायद अगले कुछ दिनों में मिल सकता है, लेकिन कांग्रेस इस मामले को काफी सावधानीपूर्वक हल करने की तैयारी में है। इसके तहत उसने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से अलग-अलग बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश की है.
कर्नाटक की राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के लिए दोनों नेताओं की तरफ से सकारात्मक पहल देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मुलाकात नाश्ते की मेज पर हो रही है. यह मुलाकात मंगलवार (2 दिसंबर 2025) को शिवकुमार के घर रखी गई थी, जिसके लिए सीएम सिद्धारमैया वहां पहुंचे.
डी.के. शिवकुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि मुख्यमंत्री को नाश्ते के लिए आमंत्रित किया गया था और दोनों नेताओं के बीच संवाद खुला और सहज रहा.
शिवकुमार ने कहा कि वह और सिद्धारमैया किसी भी अफवाहों के बावजूद एक टीम की तरह काम कर रहे हैं और सरकार के वादों को पूरा करने के लिए लगातार बातचीत करते रहते हैं. उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके रिश्ते में किसी तरह की दरार नहीं है और दोनों “भाइयों की तरह” जुड़े हुए हैं.
बता दे कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच खींचतान अपने चरम पर है. पिछले दिनों से दोनों गुटों के विधायक भी लॉबिंग में जुटे नजर आए. कुछ विधायकों की तो दिल्ली में डेरा डालने की बात भी सामने आई. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ भी कर्नाटक के कुछ विधायकों ने मुलाकात कर अपनी बात रखी. पिछला शनिवार की सुबह सिद्दारमैया की मेजबानी में नाश्ते का लुत्फ लेते डीके शिवकुमार की तस्वीर आई. जिसने नये सियासी सवालों को जन्म दिया.
इन दोनों नेताओं की ये कोशिश मानी जा रही है कि वो अपने बीच चल रहे खींचतान को सार्वजनिक नहीं होने देना चाह रहे हैं. भले ही दोनों तरफ से कई विरोधाभासी बयान अब तक सामने आ चुके हैं. नाश्ते के बाद सीएम सिद्दारमैया ने मतभेदों से किनारा करते हुए ये भी कहा कि वो जल्द ही डीके शिवकुमार के घर भोजन पर जाएंगे. वहीं डीके ने नाश्ते को अच्छा बताते हुए कहा कि ‘हम लोगों ने सिर्फ नाश्ता किया कोई राजनीतिक बात नहीं हुई’.
दो नेता एक साथ बैठें और राजनीतिक बात ना हो ये पचने जैसा नहीं लगता. लेकिन यहीं से सवाल उठ रहे हैं अगर सीएम की कुर्सी को लेकर बात नहीं हुई तो क्या ये माना जाए कि दोनों के बीच गतिरोध बना हुआ है. वहीं खबर ये भी है कि डीके आज दिल्ली के लिए रवाना होंगे. जहां जरूर राजनीतिक बात हो सकती है. अंदरखाने की बात मानी जाए तो फरवरी में बजट पेश करने के बाद सिद्दारमैया सीएम पद छोड़ सकते हैं. ऐसे में अगर कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन हुआ भी तो वो मार्च के आस पास हो सकता है.
2023 में जब कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया था तब भी कर्नाटक में सीएम पद को लेकर डीके और सिद्दारमैया के बीच जोरआजमाइश चली थी. तब ढाई ढाई साल के फार्मले पर सहमति बनी थी. ढ़ाई साल की मियाद पूरी हो चुकी है जिसके बाद कर्नाटक की राजनीति में शतरंज वाले घोड़े की ढाई चाल देखी जाने लगी. फिलहाल दोनों के बीच आपसी सहमति से बात बनती नहीं दिख रही है. ऐसे में अब सबकुछ दिल्ली पर निर्भर है. जहां कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में ऐसा कदम उठाना है जिससे पार्टी को कई नुकसान ना हो वहीं वो ये भी चाहेगी कि बीजेपी को भी इस झमेले का फायदा उठाने का मौका ना मिले.