देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह, टाटा ग्रुप के एक बड़े दान ने राजनीति में हंगामा खड़ा कर दिया है. देश के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि देश की बड़ी कंपनियां ठेके पाने के लिए रिश्वत के तौर पर चुनावी चंदा देती है.
प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया कि “टाटा ग्रुप मोदी कैबिनेट द्वारा इसके सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मंजूरी देने के कुछ ही हफ्तों बाद बीजेपी का सबसे बड़ा दाता बन गया। टाटा ग्रुप के इन दो यूनिट्स के लिए यह सब्सिडी 44,203 करोड़ रुपये है। कैबिनेट की मंजूरी के 4 हफ्ते बाद, टाटा ग्रुप ने बीजेपी को 758 करोड़ रुपये का दान दिया। घूसखोरी!”
प्रशांत भूषण, जो चुनावी चंदे के नियमों पर लंबे समय से सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने कहा कि ये कोई संयोग नहीं है. प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि देश में चुनावी चंदे का बड़ा हिस्सा ‘रिश्वत’ के तौर पर लिया जाता है. कंपनियां या तो सरकारी ठेके लेने के लिए या ED/CBI जैसी जाँच एजेंसियों के डर से सरकार को दान देती हैं.
विपक्ष ने घेरा कहा ‘सरकारी फ़ैसले, चंदे से जुड़े है’
भले ही ये दान टाटा ग्रुप के चुनावी ट्रस्ट ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के ज़रिए दिया गया, लेकिन ‘टाइमिंग’ ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का सॉलिड मौका दे दिया है. विपक्ष का कहना है कि ये घटना साफ़ दिखाती है कि बड़े कॉरपोरेट दान सीधे तौर पर सरकारी नीतियों, बड़े ठेकों और भारी-भरकम सब्सिडी की मंज़ूरी से जुड़े हुए होते है.
टाटा ग्रुप या BJP ने अभी तक इस चंदा के समय पर कोई सफ़ाई नहीं दी है. इस वजह से ये मामला राजनीतिक फंडिंग में ईमानदारी और साफ़-सफ़ाई को लेकर एक बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है.