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सावन के 4 सोमवार बदल सकते हैं आपकी किस्मत! पहले दिन मिलेगा धन लाभ, दूसरे से विवाह के योग, तीसरे पर सेहत और चौथे सोमवार बरसेगा दांपत्य सुख का आशीर्वाद

नई दिल्ली: 30 जुलाई से शुरू हुआ श्रावण मास 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। सनातन परंपरा में सावन को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और विधि-विधान से जलाभिषेक, व्रत और पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस बार सावन के चारों सोमवार विशेष शुभ योग और पर्वों के संयोग में पड़ रहे हैं, जिससे इनका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।

चारों सावन सोमवार का शुभ संयोग

इस वर्ष 3 अगस्त को पहला सावन सोमवार सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग में रहेगा। 10 अगस्त का दूसरा सोमवार सोम प्रदोष व्रत के दुर्लभ योग के साथ आएगा। 17 अगस्त को तीसरा सावन सोमवार नाग पंचमी के पावन पर्व के साथ पड़ेगा, जबकि 24 अगस्त का चौथा और अंतिम सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ प्रभाव में रहेगा।

पहला सोमवार: धन लाभ और आर्थिक उन्नति के लिए करें यह उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि आर्थिक तंगी, कर्ज या धन संबंधी परेशानियां बनी हुई हैं, तो पहले सावन सोमवार को भगवान शिव का विशेष अभिषेक करना शुभ माना जाता है। तांबे या चांदी के पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है।

दूसरा सोमवार: विवाह में आ रही बाधाएं दूर करने का शुभ अवसर

यदि विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों या मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना हो, तो दूसरे सावन सोमवार को 108 साबुत बेलपत्रों पर पीले चंदन से ‘ॐ’ या ‘राम’ लिखकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करना शुभ माना गया है।

तीसरा सोमवार: अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए करें शिव आराधना

तीसरे सावन सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद शमी के पत्ते और दूर्वा अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने से आरोग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होने का विश्वास किया जाता है।

चौथा सोमवार: सुखी दांपत्य जीवन के लिए विशेष पूजा का महत्व

सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक गन्ने के रस या केसर मिश्रित दूध से करने तथा माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है। इसे दांपत्य जीवन में सुख, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

vineet verma

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