इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसद ने एक ऐसा कदम उठा लिया है, जिसने पूरे देश की राजनीति को हिला दिया है. नए 27वें संविधान संशोधन के तहत, आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को अब ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज़ (CDF)’ का पद मिलने जा रहा है — यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना की पूरी कमान अब एक ही शख्स के हाथों में होगी. मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उन्हें पहले ही फील्ड मार्शल बना दिया गया था, और अब इस संशोधन के साथ उन्हें आजीवन इम्यूनिटी और पाकिस्तान के न्यूक्लियर कोड्स तक की एक्सेस मिल जाएगी. सवाल ये है — क्या ये देश का मॉडर्नाइजेशन है या फिर लोकतंत्र पर सेना का कब्ज़ा?
तीनों सेनाओं की चाबी अब एक जेब में!
संविधान के अनुच्छेद 243 में हुए बदलाव से अब चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद खत्म हो जाएगा. यानी, अब सिर्फ एक कमांडर — जनरल मुनीर — ही सबसे ऊपर होंगे. दिलचस्प बात ये है कि किसी कोर्ट या एजेंसी को उनके खिलाफ केस चलाने की इजाज़त नहीं होगी. सिर्फ इम्पीचमेंट ही उनका एकमात्र कानूनी रास्ता होगा. विपक्षी पार्टी PTI के सांसद अली ज़फर ने संसद में कहा, “बिना बहस के ये संशोधन पास कराना संविधान का मज़ाक उड़ाना है.”
पाकिस्तान में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. देश के इतिहास में हर बार जब कोई सिविलियन सरकार मज़बूत हुई, सेना ने उसे हटाया — 1958 में अयूब खान, 1977 में जिया उल हक़, और 1999 में मुशर्रफ ने. अब 2025 में वही कहानी संविधान के नाम पर दोहराई जा रही है.
आम जनता इसे “हाइब्रिड रेजीम 2.0” कह रही है — जहां लोकतंत्र बस नाम का है, लेकिन असली ताकत वर्दी के अंदर छिपी है. वहीं देश की अर्थव्यवस्था 25% से ज्यादा महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, जबकि सेना का “मिलिट्री इंक” बिज़नेस साम्राज्य अब GDP का 10% कंट्रोल करता है.