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नेपाल में बाढ़ से 1,050 मौतें, 4,000 अब भी लापता; अपनों की तलाश में भटक रहे परिवार, शवों की पहचान के लिए DNA जांच शुरू

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। आपदा प्रभावित आठ जिलों में सुरक्षाबलों ने मंगलवार को कई और शव बरामद किए, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1,050 हो गई है। करीब 4,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 583 विदेशी नागरिक और 83 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इस बीच बरामद शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण शुरू कर दिया गया है।

बारिश और बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई मुश्किल

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक, रुक-रुककर हो रही बारिश और कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण बचावकर्मियों को लापता और फंसे लोगों की तलाश में परेशानी हो रही है। प्रशासन ने कई इलाकों के लिए बाढ़ का नया अलर्ट भी जारी किया है। अब तक करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इसके बाद उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मची। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ा और तेज बहाव अपने साथ घर, वाहन, सड़कें और पुल बहा ले गया। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

चितवन में सबसे ज्यादा 321 शव बरामद

एनडीआरएमए के आंकड़ों के अनुसार, चितवन जिले से सबसे ज्यादा 321 शव बरामद हुए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 216, नवलपरासी वेस्ट में 170, नुवाकोट में 142, गोरखा में 65, धाडिंग में 57, रसुवा में 41 और तनहुन में 38 शव मिले हैं।

चीन की ओर भी इस आपदा में 16 लोगों की मौत की खबर है। चीनी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता हैं।

21 अस्पतालों में रखे हैं अज्ञात शव

नेपाल के अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में लापता लोगों के परिजन लगातार अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग हाथों में तस्वीरें लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं और दीवारों पर लगाए गए मृतकों के फोटो में अपनों को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, देशभर के 21 अस्पतालों में अज्ञात शव रखे गए हैं। कई शव लंबे समय तक पानी में रहने के कारण बुरी तरह सड़-गल चुके हैं। कुछ मामलों में सिर्फ आंशिक अवशेष ही बरामद हुए हैं। ऐसे में मृतकों की पहचान करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

भारत की फोरेंसिक टीम ने संभाला DNA जांच का काम

शवों की पहचान में मदद के लिए भारत से पहुंची 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। भारतीय टीम काठमांडू घाटी के खुमलटार स्थित नेपाल पुलिस केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में जांच कर रही है।

टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों से जुटाए गए डीएनए नमूनों का तेजी से विश्लेषण कर रही है, ताकि मृतकों और लापता लोगों की पहचान की जा सके और शव उनके परिवारों तक पहुंचाए जा सकें।

60 शव परिजनों को सौंपे गए, करीब 700 दफन

अधिकारियों के अनुसार, अब तक बरामद शवों में पहचान के बाद सिर्फ 60 शव परिजनों को सौंपे जा सके हैं। वहीं, करीब 700 शवों को जरूरी दस्तावेजीकरण और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बाद दफना दिया गया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनका प्रबंधन कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डीएनए नमूनों और अन्य जरूरी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा रहा है, जबकि पहचान हो चुके शव परिजनों को सौंपे जा रहे हैं।

पनबिजली परियोजनाओं में फंसे 683 कर्मचारियों की तलाश

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद अलग-अलग पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े 683 कर्मचारियों और कामगारों का अब भी पता नहीं चल पाया है। आशंका है कि इनमें से कई लोग सुरंगों के भीतर फंसे हुए हैं।

नेपाल के बचाव दल इन लोगों की तलाश में जुटे हैं। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी राहत एवं बचाव अभियान में नेपाली दलों की मदद कर रही हैं।

कई जिलों में फिर बाढ़ का खतरा

नेपाल के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में मंगलवार को एक बार फिर बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया। अधिकारियों ने नदियों के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरी एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, नुवाकोट और रसुवा में अचानक बाढ़ का खतरा काफी अधिक है। यहां छोटी नदियों और जलधाराओं में पानी का बहाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

ताप्लेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, खोटांग, ओखलढुंगा, रामेछाप, दोलखा, सिंधुपालचोक, काभ्रेपलांचोक, ललितपुर, भक्तपुर, काठमांडू और धादिंग समेत पूर्वी और मध्य नेपाल के कई जिलों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इन इलाकों में अचानक बाढ़ का मध्यम जोखिम बताया गया है।

पश्चिमी नेपाल में गोरखा, लमजुंग, डोल्पा, रुकुम पूर्व, रुकुम पश्चिम, जाजरकोट, दार्चुला, बैतड़ी, डडेलधुरा, डोटी, कैलाली और कंचनपुर के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है।

इन नदियों पर प्रशासन की खास नजर

प्रशासन कोशी, नारायणी, बागमती, कर्णाली और महाकाली समेत उनकी सहायक नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है। इसके अलावा कंकाई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती नदियों की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है।

नेपाल सरकार ने खोज और बचाव अभियान के लिए 21,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। फंसे लोगों को निकालने और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।

19 पुल बहे, काठमांडू जाने वाले रास्तों पर बदली व्यवस्था

बाढ़ में वाहनों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाले 19 पुलों के अलावा कई राजमार्ग और प्रमुख सड़कें भी बह गई हैं। इनमें चीन के साथ नेपाल का एक प्रमुख जमीनी व्यापार मार्ग भी शामिल है। दोनों देशों को जोड़ने वाला रसुवागढ़ी सीमा मार्ग भी प्रभावित हुआ है।

रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में भारी तबाही के बाद काठमांडू को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले पृथ्वी और त्रिभुवन राजमार्गों पर एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की गई है।

नई व्यवस्था के तहत काठमांडू से हेटौडा जाने वाले अधिकतम 14 सीट वाले वाहनों को फारपिंग-फाखेल-कुलेखानी-भीमफेदी मार्ग से जाने का निर्देश दिया गया है। हेटौडा से काठमांडू जाने वाले वाहनों के लिए भीमफेदी-कुलेखानी-सिस्नेरी-दक्षिणकाली मार्ग तय किया गया है।

वहीं, हेटौडा से काठमांडू जाने वाले 10 पहियों तक के बड़े मालवाहक और यात्री वाहनों को त्रिभुवन राजमार्ग का इस्तेमाल करने को कहा गया है। हेटौडा लौटने वाले ऐसे वाहनों को कांती राजमार्ग से जाने का निर्देश दिया गया है।

यह व्यवस्था धादिंग जिले के कृष्णभीर में बाढ़ से राजमार्ग का एक हिस्सा बह जाने के बाद लागू की गई है। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

vineet verma

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