तेहरान: अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने महिलाओं को हथियारों की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर में बुर्का और हिजाब पहने महिलाओं को स्वचलित राइफल से निशाना लगाने का अभ्यास कराया जा रहा है। ईरान की आईआरजीसी और बसीज रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़ी इस कवायद को संभावित जमीनी हमले की स्थिति में महिलाओं को तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ी हुई हैं और दोनों पक्ष एक-दूसरे को युद्ध की चेतावनी दे रहे हैं। इसी बीच तेहरान के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को कमांडो की निगरानी में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बताया जा रहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल अपने जमीनी सैनिकों को तेहरान में भेजते हैं, तो उनका सामना किस तरह किया जा सकता है। महिलाएं कमांडोज के निर्देशों को ध्यान से सुनने के साथ-साथ हथियारों से निशाना साधने का अभ्यास भी कर रही हैं।
ईरान में महिलाओं को दी जा रही यह ट्रेनिंग केवल स्वचलित राइफल तक सीमित नहीं है। उन्हें रॉकेट लॉन्चर चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके अलावा छोटी पिस्टल के इस्तेमाल और दुश्मन का मुकाबला करने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं को केवल हथियार पकड़ने या प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं रखा गया है। उन्हें एक कमांडो की तरह सैन्य अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर सकें।
प्रशिक्षण ले रही ईरानी महिला राहेलेह गदीरी ने कहा कि यह कहना कि किसी व्यक्ति को बिल्कुल भी डर नहीं लगता, सही नहीं होगा। उनका कहना है कि अगर लोग पहले से तैयार रहें और उन्हें आपातकाल या युद्ध जैसी परिस्थितियों में दुश्मन का सामना करने का तरीका पता हो, तो डर और घबराहट का असर कम किया जा सकता है।
गदीरी के मुताबिक, ऐसी तैयारी से महिलाएं अपने परिवार और अपने मोहल्ले की रक्षा करने के लिए भी खुद को सक्षम महसूस कर सकती हैं।
राहेलेह गदीरी ने आगे कहा कि वे व्यवस्था और अपने नेता के साथ खड़ी हैं और हर क्षेत्र में ईरान को एक बार फिर गौरवान्वित करने के लिए प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस बार वास्तव में युद्ध होने वाला है, तो वे चाहती हैं कि यह ऐसा युद्ध हो जो सब कुछ खत्म कर दे और ईरान के दुश्मनों की हार हो।
ईरान की आईआरजीसी और बसीज रेजिस्टेंस फोर्स अब महिलाओं को हथियार भी उपलब्ध करा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन महिलाओं को मोजतबा खामेनेई के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।
आईआरजीसी का मानना है कि अगर किसी दुश्मन सेना ने ईरान में प्रवेश किया, तो महिलाओं की यह फौज गुरिल्ला युद्ध में प्रभावी साबित हो सकती है। ऐसे में ईरान में महिलाओं को दी जा रही सैन्य ट्रेनिंग अमेरिका और इजरायल के साथ संभावित जमीनी टकराव की तैयारी के तौर पर सामने आ रही है।
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