28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। इसके साथ ही ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस कदम के बाद पूरी दुनिया में तेल और गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप भी इस संघर्ष से बाहर निकलने के विकल्प तलाशते नजर आ रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि खाड़ी के अधिकांश देश अभी तक खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ बयानबाजी तक सीमित हैं, जिससे क्षेत्रीय राजनीति और जटिल होती जा रही है।
इसी बीच ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी का एक बयान चर्चा में आ गया है। माना जा रहा है कि उनके इस बयान का असर अमेरिका की रणनीति पर पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि आखिर उनके बयान में ऐसा क्या था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने अमेरिकी विदेश नीति पर तीखा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका अपनी रणनीतिक पकड़ खो चुका है।
The Economist में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, ओमान के विदेश मंत्री ने कहा, “यह युद्ध अमेरिका का नहीं है, बल्कि उसे इसमें इजरायल ने बेहद रणनीतिक तरीके से खींच लिया है।”
उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा संघर्ष में अमेरिका की भूमिका सीधे तौर पर उसकी अपनी रणनीति का परिणाम नहीं, बल्कि सहयोगी देशों के प्रभाव का नतीजा है।
गौर करने वाली बात यह है कि इस तरह की राय केवल ओमान तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी कई विश्लेषक और पूर्व अधिकारी इस मुद्दे पर सवाल उठा चुके हैं।